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Good Life

अच्छा जीवन

Dr. Purnima Sharma
Dr. Purnima Sharma

कोई मित्र घर पर आए हुए थे | बातों बातों में वो कहने लगे “हम तो और कुछ नहीं चाहते, बस इतना चाहते हैं कि हमारा बेटा अच्छा जीवन जीये… अब देखो जी वो हमारे साले का बेटा है, अभी तीन चार साल ही तो नौकरी को हुए हैं, और देखो उसके पास क्या नहीं है… एक ये हमारे साहबजादे हैं, इनसे कितना भी कहते रहो कि भाई से कुछ सीखो, पर इनके तो कानों पर जूँ नहीं रेंगती… इतना कहते हैं भाई सपने बड़े देखोगे तभी बड़े आदमी बनोगे…”

उनका बेटा बहू भी वहीं बैठे थे तो बेटा “क्या पापा आप भी न हर समय बस…” बोलकर वहाँ से उठ गया और दूसरे कमरे में जा बैठा | मैं सोचने लगी “अच्छा जीवन” की हमारी परिभाषा क्या है ? ये जो इनका बेटा अभी इनसे अप्रसन्न होकर यहाँ से उठकर चला गया क्या यही है “अच्छा जीवन” ? जबकि इसके पास भी तो अच्छी खासी नौकरी है, सारी सुख सुविधाएँ हैं, फिर ये क्यों इसकी तुलना अपने भतीजे से कर रहे हैं ? क्या तथाकथित “बड़े सपने” देखना अच्छा जीवन है ? बिल्कुल हो सकता है | जितना कुछ अपने पास है उससे अधिक प्राप्त करने के सपने देखना अच्छा जीवन है ? हो सकता है | जो कुछ अपने पास है उसे सुरक्षित रखने के सपने देखना अच्छा जीवन है ? सम्भव है ऐसा ही हो | क्योंकि “बड़े सपने देखकर ही तो बड़े कार्य करने में सक्षम हो पाएँगे | क्योंकि तब हम “बड़े सपने” सत्य करने का प्रयास करेंगे” |

बड़े सपने तो कुछ भी हो सकते हैं – जैसे अथाह धन सम्पत्ति तथा भोग विलास के भौतिक साधनों को एकत्र करना भी हो सकता है, अथवा आत्मोन्नति के लिए प्रयास करना… दूसरों की निस्वार्थ भाव से सेवा करना… अपने भीतर के सुख और सन्तोष में वृद्धि करना ताकि उसके द्वारा हम दूसरों के जीवन में भी वही सुख और सन्तोष प्रदान कर सकें आदि कुछ भी हो सकता है…

यों देखा जाए तो सपने “छोटे या बड़े” हमारी कल्पना की तथा पारिवारिक और सामाजिक व्यवस्थाओं की उपज होते हैं | जबकि वास्तव में सपना सपना होता है – न छोटा न बड़ा… एक साकार हो जाए तो दूसरा आरम्भ हो जाता है… कई बार जीवन में कुछ ऐसी अनहोनी घट जाती है कि हमें लगने लगता है हमारे सारे स्वप्न समाप्त हो गए, कहीं खो गए | सम्भव है जीवन की आपा धापी में हम दूसरों की अपेक्षा कहीं पीछे छूट गए हों, अथवा अकारण ही दैवकोप के कारण हमारा कुछ विशिष्ट हमसे छिन गया हो, या ऐसा ही बहुत कुछ – जिसकी कल्पना मात्र से हम सम्भव हैं काँप उठें… किन्तु इसे दु:स्वप्न समझकर भूल जाने में ही भलाई होती है… एक “बड़ा” स्वप्न टूटा तो क्या ? फिर से नवीन स्वप्न सजाने होंगे… तभी हम आगे बढ़ सकेंगे… जीवन सामान्य रूप से जी सकेंगे… अपने साथ साथ दूसरों के भी सपनों को साकार करने में सहायक हो सकेंगे…

और यही है वास्तव में वह अनुभूति जिसे हम कहते हैं “अच्छा जीवन”… हम जीवन में कितने भी सम्बन्ध बना लें, कितनी भी धन सम्पत्ति एकत्र कर लें, किन्तु कुछ भी सदा विद्यमान नहीं रहता… सब कुछ नश्वर है… मानव शरीर की ही भाँति… जो पञ्चतत्वों से निर्मित होकर पञ्चतत्व में ही विलीन हो जाता है… तो क्यों न कोई ऐसा “बड़ा” स्वप्न सजाया जाए जो हमारे आत्मोत्थान में सहायक हो…? ताकि हमारी “अच्छे जीवन” की परिभाषा सत्य सिद्ध हो सके…

और इस सबके साथ ही एक महत्त्वपूर्ण तथ्य ये भी कि इन सभी सपनों को सत्य करने के लिए अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी आवश्यक है… स्वास्थ्य ही यदि साथ नहीं देगा तो सारे सपने अधूरे ही रह जाएँगे… और मन में एक हताशा… एक निराशा… एक कुण्ठा… जन्म ले लेगी…

___________________कात्यायनी

 

 

bookmark_borderअकेलापन और एकान्त – An article by Dr. Purnima Sharma

अकेलापन और एकान्त – An article by Dr. Purnima Sharma  

हम सभी जानते हैं कि सारा विश्व 2019 के अन्तिम माह से कोरोना से जूझ रहा है – एक ऐसी महामारी जिसने समूचे विश्व को इस तरह जकड़ लिया कि हर कोई अपने घर में

Dr. Purnima Sharma
Dr. Purnima Sharma

ही बन्द होकर बैठने को विवश हो गया | इस सबसे ये लाभ तो हुआ कि परिवार के साथ मिल बैठने के लिए अवकाश प्राप्त हुआ – क्योंकि काम की भाग दौड़ के चलते इसके लिए समय नहीं निकाल पाते थे, अपने घरों के काम जिनके लिए जहाँ हम सभी घर में काम करने के लिए आने वाले सहायकों पर निर्भर हो गए थे वहीं लॉकडाउन के कारण अपने घरों के काम परिवार के सदस्यों ने मिल जुलकर करने आरम्भ कर दिए, आए दिन जो बाहर जाकर डिनर और लंच करने का या बाहर से घर पर भोजन मँगाकर खाने का स्वभाव हम सभी का हो गया था – अब घर में पके भोजन का महत्त्व सभी को समझ आने लगा, सड़कों पर वाहनों की कमी के कारण प्रदूषण का अभाव हुआ और सारी प्रकृति फिर से एक बार युवा हो उठी, हमें सभी को अपनी अपनी उन रुचियों में कुशलता प्राप्त करने का अवसर प्राप्त हुआ जो हम सामान्य तौर पर कार्य की अधिकता के कारण नहीं कर पाते थे | और एक बात जो बहुत अच्छी हुई वो यह कि हमें स्वयं को समझने के लिए – आत्मानुशीलन और आत्म विश्लेषण के लिए समय प्राप्त हो गया – विशेष रूप से अध्यात्म के मार्ग पर अग्रसर व्यक्तियों के लिए यह एक बहुत सकारात्मक अनुभूति रही | ऐसा नहीं था कि हम एकान्त में थे, परिवार के बीच थे – लेकिन समय इतना अधिक था कि परिवार के बीच बैठकर भी कुछ समय अपने लिए निकालना सरल हो रहा था |

हम प्रायः अकेलेपन और एकान्त को समझने में भूल कर बैठते हैं और सोचने लगते हैं कि जो व्यक्ति अकेला रहता है वही वास्तव में एकान्तवासी होता है और वही एकाग्रचित्त होकर अपने लक्ष्य पर ध्यान केन्द्रित करके लक्ष्य प्राप्त कर सकता है | अथवा एकान्त में बैठकर साधना करके मोक्ष को प्राप्त हो सकता है | जबकि वास्तविकता यह है कि अकेलापन और एकान्त दोनों एक दूसरे से पृथक हैं |

अकेलापन ख़ालीपन का अहसास लिए हुए एक ऐसी भावना है जिसके चलते व्यक्ति का स्वयं पर से विश्वास उठ सकता है, उसके भीतर प्रवाहित होती रहने वाली आनन्द और प्रेम की निर्मल सरिता शुष्क हो सकती है, रुचियाँ समाप्त हो सकती हैं और यहाँ तक कि व्यक्ति घोर निराशा और अवसाद में डूब सकता है | ऐसा इसलिए कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है |

हालाँकि यह भी सच है कि अपने दैनिक क्रियाकलापों से थक कर कुछ समय के लिए यदि अकेला रहकर एकान्त के क्षणों का अनुभव किया जाए तो व्यक्ति में नवजीवन का संचार होकर फिर से कार्य के लिए उत्साह उत्पन्न हो जाता है – क्योंकि तब वह पूर्ण रूप से अपने साथ होता है | लेकिन आत्मोन्नति के लिए किसी एकान्त की आवश्यकता नहीं होती | सबके बीच बैठकर भी व्यक्ति अन्तर्मुखी हो सकता है और आत्मोन्नति के लिय एकान्त के क्षणों का अनुभव कर सकता है |

हम सभी एकान्त का अनुभव करें, अकेलेपन का नहीं, क्योंकि अकेलापन एक पीड़ादायक अहसास है – जबकि एकान्त में हम स्वयं के प्रति जागरूक होकर स्वयं के सान्निध्य का सुख अनुभव करते हैं…

__________________डॉ पूर्णिमा शर्मा

bookmark_borderUnion Budget 2021-22 Highlights

(Esteemed Members,

Yesterday our finance Minister Mrs. Nirmala Seetharaman presented the Union Budget for the year 2021-2022, here are some highlights by CA Deepali N Bansal… Deepali N Bansal is a practicing Chartered Accountant since 1999. Following article is a compilation of information available at Govt. Website and professional experts. She tried to cover maximum points which are relevant to general Public in simplified manner… Must read… Dr. Purnima Sharma…)

Union Budget 2021-22 Highlights

Deepali N Bansal
Deepali N Bansal

✅ *Direct and Indirect Tax*

  1. Senior Citizens: Reduced Compliance burden. 75 years and above. Proposal not to file ITR, if only pension income and interest income. 
  2. Reduction in time for IT Proceedings: Reopening of Assessments period reduced from 6 years to 3 years except in cases of serious tax evasion cases- where evasion evidence is 50 Lacs or more than reopening within 10 years
  3. Reducing Litigation for small tax payers – Constitution of Faceless Dispute Resolution Panel for people with Total Income upto Rs.50 lakh and disputed income of Rs.10 lakh U/S 245MA.
  4. Income Tax Appellate Tribunal to become Faceless – Only electronic communication will be done or with video call.
  5. Relaxations to NRI: Propose to notify rules for removing hardship for double taxation.
  6. Tax Audit Limit: Proposal of tax audit increased from 5 Cr. to 10 cr. (Only for 95% digitized payments business)
  7. Dividend Tax : Dividend will be exempt from TDS. Advance tax liability on dividend income will arise only after declaration or payment of dividend. For Foreign Investors – lower treaty rate benefit will be given.
  8. Tax Holiday: Propose to include tax holidays for Aircraft leasing companies
  9. Prefiling of returns: (Salary, Tax payments, TDS etc.) Details of Capital Gains, Dividend Income and Interest income will be pre-filled in the returns
  10. Small Charitable Trusts: Increased from 1 crore to 5 crores (Compliance limit)
  11. Late PF Contribution: Late deposit of employee’s contribution by employer will not be allowed as deduction
  12. Incentive to startup: Tax holiday for Start-Ups extended to 31st March, 2022. Capital Gains exemption on investment in start ups also extended to 31s March, 2022.
  13. Duties reduced :on various textile, chemicals and other products
  14. Gold and Silver: Basic Custom Duty reduced
  15. Agriculture Products: Custom duty increased on cottons, silks, alcohol etc.
  16. Section 80EEA (AHAD) deduction extended:The affordable housing additional deduction was extended till 31st March 2022. The tax exemption has been granted for affordable rental projects.

NO CHANGE IN INCOME TAX SLAB 

NO CHANGE IN EXEMPTION UNDER CHAPTER IX

NO RELIEF TO SALARY PERSON UNDER STANDARD DEDUCTION

MCA, Companies Act, LLP Act*

  1. Easing Compliance requirements of Small Companies – Threshold increased to Share Capital upto Rs.2 crore and Turnover upto Rs.20 crore will be Small Companies
  2. Allow One Person Companies (OPC) to grow without any restriction in Share Capital or Turnover. NRIs will be allowed to set-up OPCs. Presence in India of 120 days in a year enough to start an OPC.
  3. Launching MCA Version 3.0 – E-Scrutiny, E-Adjudication and Compliance management to be simplified.
  4. Decriminalisation of LLP Act, 2008
  5. Tribunals to be rationalised

 ✅ *General*

  1. First digital Budget in the history of India
  2. Vehicle Scrapping Policy: Vehicle Fitness Test after 20 years in case of Personal vehicle and 15 years in case of commercial vehicles
  3. 64,180 crores allocated for New Health Schemes
  4. 35,000 crores allocated for Covid Vaccine
  5. 7 Mega Textile Investment parks will be launched in 3 years
  6. 5.54 lakh crore provided for Capital Expenditure
  7. 1.18 lakh crore for Ministry of Roads
  8. 1.10 lakh crore allocated to Railways
  9. Proposal to amend Insurance Act: Proposal to increase FDI from 49% to 74 %. 
  10. Deposit Insurance cover (DICGC Act 1961 to be amended): Easy and time bound access of deposits to help depositors of stress banks.
  11. Proposal to revive definition of ‘Small Companies’ under Companies Act 2013: Capital less than 2 Cr. and Turnover Less than 20 Cr.
  12. Disinvestment: IPO of LIC, Announced Disinvestment of Companies will be completed in FY 2021-22
  13. Agriculture Infrastructure And Development Cess (AIDC) : has been newly imposed on petrol and diesel at Rs.2.5 and Rs.4 per litre respectively.(But no new burden on Consumers)
  14. Turant Customs :A new initiative called ‘Turant Customs’ will be introduced for faceless, paperless, and contactless customs measures.

(If you wish to get in touch with CA Deepali N Bansal, you can send an e-mail on deepalinbansal@gmail.com or call on 9873135670)

 

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उम्र या सिर्फ नंबर

पूजा भरद्वाज
पूजा भरद्वाज

बच्चा जब जन्म लेता है तो वह एक मासूम सा प्यारा सा बच्चा होता है | हर परेशानियों से दूर जिम्मेदारियों से मुक्त बचपन जब बच्चा बड़ा होता है, स्कूल जाता है, खेलता है और लंच तो ब्रेक से पहले ही खत्म हो जाता है और, उनका दिल साफ, उड़ने के लिए तैयार, आसमान को छूने को तैयार, तब तक यह सिर्फ नंबर ही होते हैं | बड़े होते हैं | नए दोस्त, पढ़ाई का बोझ, वह केवल नंबर होते हैं इस तरह बचपन खुशनुमा मस्ती भरा, थोड़ा हैवी और बहुत सारी यादों के साथ बचपन का नंबर उम्र में बदलना शुरू होता है |

तब शुरू होती है एक उम्र कई जिम्मेदारियों परेशानियों के साथ अपने प्यार को पाने, के लिए भी एक अच्छे कॉलेज में एडमिशन, एक अच्छी नौकरी की | और इस भाग दौड़ में हम जीते हैं अपनी सिर्फ एक उम्र, जिसमें होते हैं कई सवाल | जैसे इतनी उम्र में एक घर, उतनी उम्र में शादी और एक मुकाम इस बीच में रह जाती है | सिर्फ केवल एक उम्र | कुछ लोग तो सिर्फ एक उम्र ही जीते हैं | ना उनकी कोई ख्वाहिश होती है ना दिल में उमंग | उन्हें याद ही नहीं रहता कि वह आखिरी बार दिल खोलकर कब हंसे थे | कब आखिरी बार बारिश में भीगे थे | कई लोग तो इतने बोर होते हैं जैसे वह अपनी जिंदगी बोझ की तरह जी रहे हैं | वे ना उम्र जीते हैं और ना ही नंबर,…….

कुछ लोगों की किस्मत साथ देती है फिर भी पैसे कमाने की होड़ में लग जाते हैं और वह इस होड़ में इतनी दूर आ जाते हैं कि उन्हें पता ही नहीं चलता कि कितने सालों से उनकी साथी कई तरह की दवाइयां बन चुकी है | कई बार तो इतनी देर हो जाती है और उन्हें पता चलता है कि उन्हें कोई गंभीर बीमारी है | फिर उनकी आखिरी समय तक रह जाता है हॉस्पिटल का एक बेड चार बाय चार का कमरा, एक गर्म पानी की बोतल, और बिना स्वाद वाला खाना, और कई सवाल – क्यों मैंने एक पिंजरे में बंद पक्षी की तरह जिंदगी जी – क्यों मैंने एक उम्र जी – क्यों मैं उसे नंबर में नहीं बदल सका…

इसलिए उठो… थोड़ा सोचो… ज्यादा देर हो जाए उससे पहले स्वयं को पहचानो… तुम्हें क्या पसंद है… और शुरूआत करो एक सफर की उम्र को नंबर में बदलने की…

सुबह उठकर 5 मिनट पसंदीदा गाने पर अपने पांव को थिरकाओ | चाहे उम्र 90 की क्यों ना हो फिर भी जिंदादिली से अपनी इच्छाओं को पूरा करो और एक बार अपना बचपन फिर जी लो | हर वह काम करो जो कहीं किसी दिल में कोने में दब गया था | एक बार फिर बचपन जी लो बच्चों के साथ बच्चे बनकर दिल खोलकर हंसो और 90 की उम्र में भी एक गोल्ड मेडल जीतो | हर वह काम करो कि मरने का अफसोस ना रहे और ना कोई सवाल, हो तो एक चेहरे पर बड़ी मुस्कान… एक खुशी… और मन की शांति कि मैंने केवल उम्र नहीं जी… मैंने अपनी उम्र को रोक दिया है सिर्फ नंबर में… और हर पल की एक सेल्फी लो… जब उसे देखो तो मन खुश हो जाए और चेहरे पर आ जाए बड़ी मुस्कान कि हमने अपनी उम्र को नंबर मैं रोक दिया,………,🙏😊😊

         पूजा भारद्वाज

(पूजा भारद्वाज ने दिल्ली के हंसराम कॉलेज से आर्ट्स में ग्रेजुएशन किया है | वर्तमान में ये अपने पति के साथ मिलकर financial consultancy services देती हैं | इस सबके साथ ही इन्हें पेंटिंग का तथा कुकिंग का शौक़ है | साथ में लिखने का भी शौक़ है | ये WOW India की इन्द्रप्रस्थ विस्तार ब्रांच की सदस्य हैं…) डॉ पूर्णिमा शर्मा…

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मानसिक तनाव और अवसाद

हम जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफल रहें और हमें किसी प्रकार का मानसिक तनाव न हो इसके लिए हमें जीवन भर कहीं न कहीं से कोई न कोई सलाह मिलती ही रहती है – यह करो, वह न करो – इत्यादि इत्यादि, और आप स्वयं को इस सुझावों के चक्रव्यूह में घिरा अनुभव करने लगते हैं | पर क्या आज के समय में ऐसा कोई व्यक्ति है जो तनाव रहित जीवन जी रहा हो ? कभी कभी तो लगता है कि ये तनाव मनुष्य के जीवन का अभिन्न अंग हैं | इनसे भागा नहीं जा सकता, हाँ इन्हें कम अवश्य किया जा सकता है | बहुत से तनाव तो ऐसे होते हैं कि जिनका कोई औचित्य ही नहीं होता | अनावश्यक रूप से हमने उन तनावों को ओढ़ लिया होता है |

इसलिए सबसे पहली आवश्यकता है कि हम अपने जीवन का, अपनी भावनाओं का और अपने परिवेश का अच्छी तरह आकलन करें | इससे हमें उन वस्तुओं, उन परिस्थितियों, उन सम्बन्धों को पहचानने में सहायता प्राप्त होगी जिनके कारण हमें तनाव होता है | उन बातों की एक सूची तैयार करें जिनके कारण हमें तनाव होता है | अब इस सूची में से उन बातों को खोजें जो हमारे लिए निरर्थक हैं और जिन्हें हम सरलता से अपने जीवन से निकाल सकते हैं | अब ईमानदारी के साथ इन्हें अपने जीवन से निकालने का प्रयास करें | इनमें से कुछ टेंशन तो ऐसी होंगी जिन्हें हम अपनी जीवनशैली यानी लाइफ स्टाइल में सुधार करके दूर कर सकते हैं |

साथ ही, सम्बन्धों के प्रति ईमानदार रहें | कुछ सम्बन्ध ऐसे भी होंगे जो हमारे लिए निरर्थक या हम पर बोझ होंगे और उनके कारण हमें निरन्तर तनाव का – नकारात्मकता का अनुभव होता होगा | उन सम्बन्धों को यदि छोड़ा भी नहीं जा सकता है तो कम से कम उनसे विनम्रता पूर्वक इतनी दूरी अवश्य बनाई जा सकती है कि वे आपको प्रभावित न कर सकें | सम्बन्ध परस्पर सम्मान की भावना पर आधारित होने चाहिएँ और उनमें किसी प्रकार की अपेक्षा दोनों ही ओर से नहीं होनी चाहिए | साथ ही, यदि आप विवाहित हैं, तो ध्यान रहे – विवाहेतर सम्बन्ध सदैव तनाव का कारण होते हैं |

अपने जीवन मूल्यों और अपने कार्य के प्रति निष्ठावान रहें | और अपने प्रति भी निष्ठावान रहें | ऐसा करने से आपका बहुत से तनाव स्वतः ही दूर हो जाएगा | बहुत से तनाव तो इसलिए भी उत्पन्न होते हैं कि हमें वो कार्य करने पड़ते हैं जिनमें हमारी रुचि नहीं होती | माता पिता या रिश्तेदारों ने कहा ये कोर्स कर लो, ये काम कर लो, उसमें रूचि है या नहीं – लेकिन करना पड़ जाता है | ऐसे में न तो उस कार्य में मन लगेगा और न ही उसमें पूर्ण कुशलता प्राप्त हो पाएगी | और यही सबसे कारण बन जाएगा मानसिक तनाव का – मानसिक अवसाद का | इसलिए प्रयास ऐसा करना चाहिए की आपकी शिक्षा दीक्षा यानी एजुकेशन और आपका व्यवसाय यानी प्रोफेशन आपकी रुचि का हो | केवल पैसा कमाने के लिए काम करेंगे तो तनाव स्वाभाविक है | और इस बात को आपके परिवारजनों को भी समझना आवश्यक है | भले ही आपको सपरिवार इसके लिए काउंसलिंग ही क्यों न लेनी पड़े | ऐसा करके आपको उचित दिशा निर्देश प्राप्त होगा और आप सफलतापूर्वक बिना किसी तनाव के अपना कार्य करने में सक्षम हो सकेंगे |

ध्यान रहे हमारे पास दिन भर में 24 घण्टे ही होते हैं, लेकिन हम सारे संसार को प्रसन्न रखना चाहते हैं – जिसके लिए 48 घण्टे भी कम पड़ जाते हैं और हम मानसिक तनाव में आ जाते हैं | इसलिए सोच समझ कर अपनी सामर्थ्य के अनुसार कार्य करना चाहिए |

यदि जीवन शैली और सोच इस प्रकार की होगी तो सरलता से एक ईमानदार, सत्यता से युक्त, आनन्दमय लेकिन सादा जीवन जी सकते हैं |

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2020/06/27/mental-stress-and-depression/

 

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जीवन में वास्तविक रूप से सफल व्यक्ति की पहचान

जीवन संघर्षों का नाम है | संघर्षों से लड़ते हुए जो व्यक्ति बिना धैर्य खोए आगे बढ़ता रहता है वही व्यक्ति जीवन में सफल होता है – अपने लक्ष्य को प्राप्त करता है | जो

Dr. Purnima Sharma
Dr. Purnima Sharma

व्यक्ति संकटों और संघर्षों से घबराता नहीं, बाधाओं के उपस्थित होने पर अपना धैर्य नहीं खोने देता उसी व्यक्ति की सफलता की कहानियों को लोग युगों युगों तक याद करते रहते हैं |

“भय बाधा से हार मानकर आगे पीछे क़दम बढ़ाना
यह इस पथ की रीत नहीं, ना कर्मयोगी का है यह बाना |”

लेकिन सफलता किसी को भी यों ही प्राप्त नहीं हो जाती | सफलता प्राप्ति के लिए तथा उस सफलता के अहंकार से बचने के लिए और विनम्र भाव से हर किसी की सहायता करते रहने के लिए व्यक्ति में कुछ विशेष गुणों का होना भी आवश्यक है |

सबसे पहली आवश्यकता है सकारात्मक सोच | व्यक्ति की सोच सकारात्मक होगी तो वह कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी साहस के साथ मार्ग बनाकर आगे बढ़ सकता है | साथ ही जो व्यक्ति जीवन में सफल हो जाता है – जिसे कुछ उपलब्धि हो जाती है – ऐसे व्यक्ति का दृष्टिकोण पूर्ण रूप से सकारात्मक हो जाता है | किसी प्रकार की नकारात्मकता के लिए वहाँ कोई स्थान नहीं रहता न ही किसी दूसरे व्यक्ति की आलोचना की सोच उसके मन में आने पाती है | अपितु अन्य व्यक्तियों के समक्ष वह अपने प्रतिद्वन्द्वियों की भी हृदय से प्रशंसा ही करता है | क्योंकि उस व्यक्ति के मन में समभाव – समत्व बुद्धि – आ जाती है |

व्यक्ति को बड़े से बड़े अवॉर्ड क्यों न मिल जाएँ उसकी योग्यताओं के कारण, कितनी भी सम्पन्नता क्यों न प्राप्त हो जाए उसकी समझदारी और परिश्रम के बल पर, किन्तु यदि उसकी सोच में तनिक भी नकारात्मकता है – अहंकार है – दूसरों की अस्वस्थ आलोचना (स्वस्थ भाव से की गई आलोचना व्यक्ति को भूल सुधार का अवसर प्रदान करती है) करने का स्वभाव है – वह व्यक्ति बाहर से सफल होते हुए भी भीतर से बिल्कुल रीता है – अपूर्ण है – असन्तुष्ट है |

इसके साथ ही आवश्यकता है कि व्यक्ति को समाधान बनने का प्रयास करना चाहिए न की यह कि वह स्वयं ही समस्या बन जाए – समस्या का कारण बन जाए | जो व्यक्ति हर बात में – हर परिस्थिति में केवल समस्याएँ ही देखता है उसे कोई भी बड़ा उत्तरदायित्व सौंपने से बचता है | उसकी बातों को भी लोग गम्भीरता से नहीं लेते | जो लोग समस्या में भी समाधान खोज लेते हैं वही प्रगति के मार्ग पर अग्रसर होकर अपना लक्ष्य प्राप्त करते हैं और सफल होते हैं तथा दूसरों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करते हैं | ऐसे व्यक्ति दूसरों की समस्याओं का भी समाधान कर सकने में सक्षम होते हैं |

सफल व्यक्तियों का स्वभाव होता है कि वे सदा अपने कार्य का सम्मान करते हैं तथा दूसरों के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करते | क्योंकि जो व्यक्ति अपने कार्य का सम्मान करता है कार्य भी उसका सम्मान करता है | साथ ही जो व्यक्ति दूसरों के कार्यों में बिना कहे हस्तक्षेप नहीं करते दूसरे व्यक्ति भी उनका सम्मान करते हैं और इस प्रकार उन्हें अपना लक्ष्य प्राप्त करने में भी सहायता प्राप्त होती है | साथ ही, सफल व्यक्ति कभी भी किसी दूसरे व्यक्ति के कार्य में व्यवधान उत्पन्न करने का प्रयास नहीं करते अपितु जितना सम्भव हो उस व्यक्ति को आगे बढ़ाने में उसकी सहायता ही करते हैं |

और सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि – जैसा आरम्भ में ही लिखा है – सफलता की कामना करने वाला व्यक्ति धैर्य और उत्साह से परिपूर्ण होता है | अपनी स्वयं की भूलों से सीख लेकर साहस के साथ आगे बढ़ता है और सफलता का आनन्द उठता है | ऐसे सफल व्यक्ति अपने कथनों और कार्यों के माध्यम से बिना किसी स्वार्थ के दूसरों का भी धैर्य और साहस बढ़ाने में सहयोग देते हैं… डॉ पूर्णिमा शर्मा 

 

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मानसिक शान्ति

मानसिक शान्ति – जिसकी आजकल हर किसी को आवश्यकता है – चाहे वह किसी भी व्यवसाय से जुड़ा हो, गृहस्थ हो, सन्यासी हो – विद्यार्थी हो – कोई भी हो – हर किसी

Dr. Purnima Sharma
Dr. Purnima Sharma

का मन किसी न किसी कारण से अशान्त रहता है | और हम अपनी मानसिक अशान्ति का दोष अपनी परिस्थितियों तथा अपने आस पास के व्यक्तियों पर – समाज पर – मढ़ देते हैं | कितना भी ब्रह्म मुहूर्त में प्राणायाम, योग और ध्यान का अभ्यास कर लिया जाए, कितना भी चक्रों को जागृत कर लिया जाए – मन की अशान्ति, क्रोध, चिड़चिड़ापन और कई बार उदासी यानी डिप्रेशन भी – जाता ही नहीं | किन्तु समस्या यह है कि जब तक व्यक्ति का मन शान्त नहीं होगा तब तक वह अपने कर्तव्य कर्म भी सुचारु रूप से नहीं कर पाएगा, क्योंकि मन एक स्थान पर – एक लक्ष्य पर स्थिर ही नहीं रह पाएगा | हमने ऐसे लोग देखें हैं जो नियमित ध्यान का अभ्यास करते हैं, प्राणायाम, ध्यान और योग सिखाते भी हैं – लेकिन उनके भीतर का क्रोध, घृणा, लालच, दूसरों को नीचा दिखाने की उनकी प्रवृत्ति में कहीं किसी प्रकार की कमी नहीं दिखाई देती |

अस्तु, मन को शान्त करने के क्रम में सबसे पहला अभ्यास है मन को – अपने ध्यान को – उन बातों से हटाना जिनके कारण व्यवधान उत्पन्न होते हैं या मन के घोड़े इधर उधर भागते हैं | जब तक इस प्रकार की बातें मन में रहेंगी – मन का शान्त और स्थिर होना कठिन ही नहीं असम्भव भी है | इसीलिए पतंजलि ने मनःप्रसादन की व्याख्या दी है |

महर्षि पतंजलि ने ऐसे कुछ भावों के विषय में बताया है जो इस प्रकार की बाधाओं को दूर करने में सहायक होते हैं | ये हैं – मित्रता, करुणा या संवेदना और धैर्य तथा समभाव | निश्चित रूप से यदि मनुष्य इन प्रवृत्तियों को अपने दिन प्रतिदिन के व्यवहार में अपना लेता है तो नकारात्मक विचार मन में आने ही नहीं पाएँगे | किसी भी व्यक्ति के किसी विषय में व्यक्तिगत विचार हो सकते हैं | यदि उसके उन विचारों से किसी को कोई हानि नहीं पहुँच रही है तो हमें इसकी आलोचना करने का या उसे टोकने का कोई अधिकार नहीं | ऐसा करके हम अपना मन ही अशान्त नहीं करते, वरन अपनी साधना के मार्ग में व्यवधान उत्पन्न करके लक्ष्य से बहुत दूर होते चले जाते हैं |

अतः जब भी और जहाँ भी कुछ अच्छा – कुछ आनन्ददायक – कुछ सकारात्मक ऊर्जा से युक्त दीख पड़े – हमें सहज आनन्द के भाव से उसकी सराहना करनी चाहिए और यदि सम्भव हो तो उसे आत्मसात करने का प्रयास भी करना चाहिए, ताकि हमारे मन में वह आनन्द का अनुभव दीर्घ समय तक बना रहे – न कि अपनी व्यक्तिगत ईर्ष्या, दम्भ, अहंकार आदि के कारण उस आनन्ददायक क्षण से विरत होकर उदासी अथवा क्रोध की चादर ओढ़कर एक ओर बैठ जाया जाए | ऐसा करके आप न केवल उस आनन्द के क्षण को व्यर्थ गँवा देंगे, बल्कि चिन्ताग्रस्त होकर अपनी समस्त सम्भावनाओं को भी नष्ट कर देंगे | आनन्द के क्षणों में कुछ इतर मत सोचिए – बस उन कुछ पलों को जी लीजिये | इसी प्रकार जब कभी कोई प्राणी कष्ट में दीख पड़े हमें उसके प्रति दया, करुणा, सहानुभूति और अपनापन दिखाने में तनिक देर नहीं करनी चाहिए | आगे बढ़कर स्नेहपूर्वक उसे भावनात्मक अवलम्ब प्रदान चाहिए |

इस प्रकार चित्त प्रसादन के उपायों का पालन करके कोई भी व्यक्ति मानसिक स्तर पर एकाग्र तथा प्रसन्न अवस्था में रह सकता है | यदि हमारा व्यवहार ऐसा होगा – यदि इन दोनों बातों का अभ्यास हम अपने नित्य प्रति के जीवन में करेंगे – तो हमारा चित्त प्रसन्न रहेगा – और विश्वास कीजिये – इससे बड़ा ध्यान का अभ्यास कुछ और नहीं हो सकता | इस अभ्यास को यदि हम दोहराते रहते हैं तो कोई भी विषम परिस्थिति हमारा चित्त अशान्त नहीं कर पाएगी – किसी भी प्रकार का नकारात्मक विचार हमारे मन में नहीं उत्पन्न होने पाएगा और हमारा मन आनन्दमिश्रित शान्ति का अनुभव करेगा… डॉ पूर्णिमा शर्मा 

 

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Bachpan ki yadein

बचपन की यादें

सुनीता अरोड़ा
सुनीता अरोड़ा

बचपन की वो यादें आज ताज़ा हो गईं |

रात को जब सोते हुए आसमां के तारे गिना करते थे,

और देखते ही देखते गहरी नींद सो जाया करते थे तो,

आज बाहर आकर आसमां की ओर देखा / तो तारे देख,

बचपन की वो यादें ताज़ा हो गईं |

मम्मी पापा के साथ मिलकर काम करते हुए जो खुशी महसूस होती थी,

फिर से वही सब करते हुए उसी खुशी का अनुभव हुआ

और बचपन की वो यादें ताज़ा हो गईं |

परिवार के साथ मिलकर लूडो खेलना,

TV देखना, कैरम बोर्ड खेलना,

फिर से लौट आए,

और बचपन की वो यादें ताज़ा हो गईं |

मम्मी के साथ रसोईघर में हाथ बंटाना,

और देखते ही देखते सब कुछ सीख जाना,

आज अपने बच्चों को देख वह याद आ गया

और बचपन की वो यादें ताज़ा हो गईं |

परिवार के साथ रहकर खुशी को महसूस करना

अपने सुख-दुख को बांटना आनंदित कर गया

और बचपन की वो यादें ताज़ा हो गईं |

सुनीता अरोड़ा

(ये रचना सुनीता अरोड़ा ने लिखी है | सुनीता अरोड़ा WOW India की इन्द्रप्रस्थ ब्रांच की Treasurer होने के साथ ही समाज सेवा के क्षेत्र से भी जुडी हुई हैं | साथ ही ये Haley Star Public School की Principal भी हैं | लिखने का शौक़ रखती हैं, जो इस रचना से पता ही चल रहा है…)

 

bookmark_borderप्रगति का सोपान सकारात्मकता

प्रगति का सोपान सकारात्मकता

व्यक्ति के लिए हर दिन – हर पल एक चुनौती का समय होता है | और आजकल के समय में जब सब कुछ बड़ी तेज़ी से बदल रहा है – यहाँ तक कि प्रकृति के परिवर्तन भी बहुत तेज़ी से ही रहे हैं – इस सारे बदलाव और जीवन की भागम भाग के चलते मनुष्य के मन में बहुत सी शंकाएँ अपने वर्तमान और भविष्य को लेकर घर करती जा रही हैं | इन्हीं शंकाओं के कारण हम सब अनेक प्रकार की नकारात्मकताओं के शिकार भी होते जा रहे हैं |

किन्तु इस सबसे घबराकर निष्कर्मण्य होकर बैठ रहना, किसी तनाव का शिकार होकर बैठ रहना या अपने आप पर से विश्वास उठा लेना – कि नहीं, हमसे ये नहीं होगा – ये सब स्वस्थ मानसिकता के लक्षण नहीं हैं | हमें साहस और समझदारी के साथ हर चुनौती का सामना करते हुए आगे बढ़ते रहने का प्रयास करना चाहिए – क्योंकि जीवन गतिशीलता का ही नाम है | और इसका एक ही उपाय है – आशावान बने रहकर हर परिस्थिति में से कुछ सकारात्मक खोजने का प्रयास किया जाए | सकारात्मकता का एक सिरा भी यदि हाथ में आ गया तो उसके सहारे आगे बढ़ने का और उस परिस्थिति या व्यक्ति के अन्य सकारात्मक पक्षों को ढूंढ निकालने का कार्य किया जा सकता है | और यदि अधिक सकारात्मकता नहीं भी दीख पड़ती है – क्योंकि हम स्वयं बहुत सी शंकाओं से घिरे हुए हैं – तो जो सिरा हाथ आया है उसे ही मजबूत बनाने का प्रयास करेंगे तो अन्य नकारात्मकताएँ सकारात्मकता में परिणत होती जाएँगी |

इसका अर्थ यह नहीं हुआ कि परिस्थिति की नकारात्मकताओं के साथ समझौता किया जाए | नहीं, बल्कि उन्हें सकारात्मक बनाने का प्रयास करना है | क्योंकि जीवन में कभी भी सब कुछ सकारात्मक या मनोनुकूल नहीं उपलब्ध होता है | और नकारात्मकताओं के धागे इतने एक दूसरे से बँधे हुए होते हैं कि एक धागे को खींचेंगे तो सारा का सारा आवरण उधड़ता चला जाएगा और तब सारे तार ऐसे उलझ जाएँगे कि उन्हें सुलझाना असम्भव हो जाएगा |

इसीलिए हमारे मनीषियों ने कहा है कि सुख और दुःख, सफलता और असफलता सबमें समभाव रहते हुए कर्तव्य कर्म करते रहना चाहिए | मन को शान्त करने का अभ्यास करते रहना चाहिए | अच्छा बुरा सब पानी के बुलबुले के समान है जो नष्ट होना ही है | हम सबका ध्येय वो बुलबुला नहीं है, उसके पीछे का वो गहरा और अथाह समुद्र है जिसकी हलचल इस सबका कारण है – जिसकी सतह पर ये बुलबुले दीख पड़ते हैं |

सकारात्मकता और नकारात्मकता के फेर में पड़कर हमारी खोज प्रायः उन वस्तुओं या परिस्थितियों पर केन्द्रित होकर रह जाती है जो वास्तविक नहीं हैं और इसी कारण असंतुष्टि का भाव बना रहता है – जो मानसिक तनाव का सबसे बड़ा कारण है |

वास्तव में जिन्हें हम सकारात्मक और नकारात्मक कहते हैं, सफलता और असफलता कहते हैं – उनमें से कुछ भी वास्तविक नहीं है | केवल मात्र हमारे स्वयं के “अहं” – जिसे ईगो कहा जाता है – की सन्तुष्टि और असन्तुष्टि की उपज होती है | या फिर हमारे परिवार, गुरुजनों, समाज आदि ने हमारे मन में कहीं बहुत गहराई में इसे आरोपित कर दिया होता है | जिस दिन हम इस यथार्थ को समझ गए उस दिन न केवल हमारा मन शान्त हो जाएगा, बल्कि हम हर वस्तु, हर व्यक्ति और हर परिस्थिति में समभाव रहकर केवलमात्र सकारात्मक विचारों और भावों के साथ जीना सीख जाएँगे | यह कार्य कठिन हो सकता है, किन्तु अभ्यास करेंगे तो असम्भव भी नहीं होगा…

हम सभी हर परिस्थिति में सकारात्मकता बनाए रखें यही कामना है… क्योंकि जीवन में प्रगति का एक सोपान यही है…

https://shabd.in/post/113630/pragati-ka-sopan-sakaratmakata

 

bookmark_borderHomeopathy – A holistic specialized treatment option

Homeopathy – A holistic specialized treatment option

Homeopathy is an individualized mode of treatment which is tailor made for a particular patient. It was discovered more than two hundred years ago by a German doctor Dr. C S F Hahnemann. It is useful for a number of conditions and diseases.

The most interesting part about the treatment is that it can treat you even when you are not diagnosed with an illness but you have a lot of complaints. It can also treat you when you have one or many diseases diagnosed together. The homeopathic doctor asks you a detailed history of your complaints, your past medical history, your family history of diseases and your general symptoms. Based on this detailed history, your personal likes and dislikes, your sleep position etc. the doctor tries to understand what is wrong with your system and how it can be corrected.

The doctor prescribes medicines which have to be taken two or three times a day in pill form. These pills have very low-calorie value and are absolutely safe for diabetics as well. Sometimes weekly medicines are also given to boost your immunity so this prevents you from falling sick also. The doctor can manage your acute diseases as well as chronic diseases together. Regular treatment improves your quality of life and you understand your cause or causes of falling sick. Even if you have mental symptoms or emotional problems, the medicines can remove them without much delay.

The common myth about homeopathy being slow is no longer true because the treatment protocol is designed in a manner to give you speedy recovery. Another lesser known benefit of homeopathy is that it can treat problems which you forget to tell your doctor or which you are unaware of. If the treatment protocol suits you even those complaints that you never discussed would be taken care of over a period of time. This is because homeopathy acts on the functional level and the normal functioning of your organs is achieved.

It boosts your mental, spiritual, physical as well as emotional well-being and is the safest way to rediscover health.

 

 (Dr Priya Kapoor, BHMS, MD (Hom) is the is a Homeopathic consultant with over eighteen years of clinical experience. She is a graduate and post- graduate in Homeopathy from Nehru Homeopathic Medical College and Hospital, University of Delhi and Aurangabad respectively. She has the experience of working with a renowned homeopath Dr. Jugal Kishore for seven years and has been involved in researching and writing books on Homeopathy. She has the experience of working in Pushpanjali Crosslay hospital, now max Superspeciality for last ten years.)