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bookmark_borderमानसिक तनाव और अवसाद

मानसिक तनाव और अवसाद

हम जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफल रहें और हमें किसी प्रकार का मानसिक तनाव न हो इसके लिए हमें जीवन भर कहीं न कहीं से कोई न कोई सलाह मिलती ही रहती है – यह करो, वह न करो – इत्यादि इत्यादि, और आप स्वयं को इस सुझावों के चक्रव्यूह में घिरा अनुभव करने लगते हैं | पर क्या आज के समय में ऐसा कोई व्यक्ति है जो तनाव रहित जीवन जी रहा हो ? कभी कभी तो लगता है कि ये तनाव मनुष्य के जीवन का अभिन्न अंग हैं | इनसे भागा नहीं जा सकता, हाँ इन्हें कम अवश्य किया जा सकता है | बहुत से तनाव तो ऐसे होते हैं कि जिनका कोई औचित्य ही नहीं होता | अनावश्यक रूप से हमने उन तनावों को ओढ़ लिया होता है |

इसलिए सबसे पहली आवश्यकता है कि हम अपने जीवन का, अपनी भावनाओं का और अपने परिवेश का अच्छी तरह आकलन करें | इससे हमें उन वस्तुओं, उन परिस्थितियों, उन सम्बन्धों को पहचानने में सहायता प्राप्त होगी जिनके कारण हमें तनाव होता है | उन बातों की एक सूची तैयार करें जिनके कारण हमें तनाव होता है | अब इस सूची में से उन बातों को खोजें जो हमारे लिए निरर्थक हैं और जिन्हें हम सरलता से अपने जीवन से निकाल सकते हैं | अब ईमानदारी के साथ इन्हें अपने जीवन से निकालने का प्रयास करें | इनमें से कुछ टेंशन तो ऐसी होंगी जिन्हें हम अपनी जीवनशैली यानी लाइफ स्टाइल में सुधार करके दूर कर सकते हैं |

साथ ही, सम्बन्धों के प्रति ईमानदार रहें | कुछ सम्बन्ध ऐसे भी होंगे जो हमारे लिए निरर्थक या हम पर बोझ होंगे और उनके कारण हमें निरन्तर तनाव का – नकारात्मकता का अनुभव होता होगा | उन सम्बन्धों को यदि छोड़ा भी नहीं जा सकता है तो कम से कम उनसे विनम्रता पूर्वक इतनी दूरी अवश्य बनाई जा सकती है कि वे आपको प्रभावित न कर सकें | सम्बन्ध परस्पर सम्मान की भावना पर आधारित होने चाहिएँ और उनमें किसी प्रकार की अपेक्षा दोनों ही ओर से नहीं होनी चाहिए | साथ ही, यदि आप विवाहित हैं, तो ध्यान रहे – विवाहेतर सम्बन्ध सदैव तनाव का कारण होते हैं |

अपने जीवन मूल्यों और अपने कार्य के प्रति निष्ठावान रहें | और अपने प्रति भी निष्ठावान रहें | ऐसा करने से आपका बहुत से तनाव स्वतः ही दूर हो जाएगा | बहुत से तनाव तो इसलिए भी उत्पन्न होते हैं कि हमें वो कार्य करने पड़ते हैं जिनमें हमारी रुचि नहीं होती | माता पिता या रिश्तेदारों ने कहा ये कोर्स कर लो, ये काम कर लो, उसमें रूचि है या नहीं – लेकिन करना पड़ जाता है | ऐसे में न तो उस कार्य में मन लगेगा और न ही उसमें पूर्ण कुशलता प्राप्त हो पाएगी | और यही सबसे कारण बन जाएगा मानसिक तनाव का – मानसिक अवसाद का | इसलिए प्रयास ऐसा करना चाहिए की आपकी शिक्षा दीक्षा यानी एजुकेशन और आपका व्यवसाय यानी प्रोफेशन आपकी रुचि का हो | केवल पैसा कमाने के लिए काम करेंगे तो तनाव स्वाभाविक है | और इस बात को आपके परिवारजनों को भी समझना आवश्यक है | भले ही आपको सपरिवार इसके लिए काउंसलिंग ही क्यों न लेनी पड़े | ऐसा करके आपको उचित दिशा निर्देश प्राप्त होगा और आप सफलतापूर्वक बिना किसी तनाव के अपना कार्य करने में सक्षम हो सकेंगे |

ध्यान रहे हमारे पास दिन भर में 24 घण्टे ही होते हैं, लेकिन हम सारे संसार को प्रसन्न रखना चाहते हैं – जिसके लिए 48 घण्टे भी कम पड़ जाते हैं और हम मानसिक तनाव में आ जाते हैं | इसलिए सोच समझ कर अपनी सामर्थ्य के अनुसार कार्य करना चाहिए |

यदि जीवन शैली और सोच इस प्रकार की होगी तो सरलता से एक ईमानदार, सत्यता से युक्त, आनन्दमय लेकिन सादा जीवन जी सकते हैं |

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2020/06/27/mental-stress-and-depression/

 

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जीवन में वास्तविक रूप से सफल व्यक्ति की पहचान

जीवन संघर्षों का नाम है | संघर्षों से लड़ते हुए जो व्यक्ति बिना धैर्य खोए आगे बढ़ता रहता है वही व्यक्ति जीवन में सफल होता है – अपने लक्ष्य को प्राप्त करता है | जो

Dr. Purnima Sharma
Dr. Purnima Sharma

व्यक्ति संकटों और संघर्षों से घबराता नहीं, बाधाओं के उपस्थित होने पर अपना धैर्य नहीं खोने देता उसी व्यक्ति की सफलता की कहानियों को लोग युगों युगों तक याद करते रहते हैं |

“भय बाधा से हार मानकर आगे पीछे क़दम बढ़ाना
यह इस पथ की रीत नहीं, ना कर्मयोगी का है यह बाना |”

लेकिन सफलता किसी को भी यों ही प्राप्त नहीं हो जाती | सफलता प्राप्ति के लिए तथा उस सफलता के अहंकार से बचने के लिए और विनम्र भाव से हर किसी की सहायता करते रहने के लिए व्यक्ति में कुछ विशेष गुणों का होना भी आवश्यक है |

सबसे पहली आवश्यकता है सकारात्मक सोच | व्यक्ति की सोच सकारात्मक होगी तो वह कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी साहस के साथ मार्ग बनाकर आगे बढ़ सकता है | साथ ही जो व्यक्ति जीवन में सफल हो जाता है – जिसे कुछ उपलब्धि हो जाती है – ऐसे व्यक्ति का दृष्टिकोण पूर्ण रूप से सकारात्मक हो जाता है | किसी प्रकार की नकारात्मकता के लिए वहाँ कोई स्थान नहीं रहता न ही किसी दूसरे व्यक्ति की आलोचना की सोच उसके मन में आने पाती है | अपितु अन्य व्यक्तियों के समक्ष वह अपने प्रतिद्वन्द्वियों की भी हृदय से प्रशंसा ही करता है | क्योंकि उस व्यक्ति के मन में समभाव – समत्व बुद्धि – आ जाती है |

व्यक्ति को बड़े से बड़े अवॉर्ड क्यों न मिल जाएँ उसकी योग्यताओं के कारण, कितनी भी सम्पन्नता क्यों न प्राप्त हो जाए उसकी समझदारी और परिश्रम के बल पर, किन्तु यदि उसकी सोच में तनिक भी नकारात्मकता है – अहंकार है – दूसरों की अस्वस्थ आलोचना (स्वस्थ भाव से की गई आलोचना व्यक्ति को भूल सुधार का अवसर प्रदान करती है) करने का स्वभाव है – वह व्यक्ति बाहर से सफल होते हुए भी भीतर से बिल्कुल रीता है – अपूर्ण है – असन्तुष्ट है |

इसके साथ ही आवश्यकता है कि व्यक्ति को समाधान बनने का प्रयास करना चाहिए न की यह कि वह स्वयं ही समस्या बन जाए – समस्या का कारण बन जाए | जो व्यक्ति हर बात में – हर परिस्थिति में केवल समस्याएँ ही देखता है उसे कोई भी बड़ा उत्तरदायित्व सौंपने से बचता है | उसकी बातों को भी लोग गम्भीरता से नहीं लेते | जो लोग समस्या में भी समाधान खोज लेते हैं वही प्रगति के मार्ग पर अग्रसर होकर अपना लक्ष्य प्राप्त करते हैं और सफल होते हैं तथा दूसरों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करते हैं | ऐसे व्यक्ति दूसरों की समस्याओं का भी समाधान कर सकने में सक्षम होते हैं |

सफल व्यक्तियों का स्वभाव होता है कि वे सदा अपने कार्य का सम्मान करते हैं तथा दूसरों के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करते | क्योंकि जो व्यक्ति अपने कार्य का सम्मान करता है कार्य भी उसका सम्मान करता है | साथ ही जो व्यक्ति दूसरों के कार्यों में बिना कहे हस्तक्षेप नहीं करते दूसरे व्यक्ति भी उनका सम्मान करते हैं और इस प्रकार उन्हें अपना लक्ष्य प्राप्त करने में भी सहायता प्राप्त होती है | साथ ही, सफल व्यक्ति कभी भी किसी दूसरे व्यक्ति के कार्य में व्यवधान उत्पन्न करने का प्रयास नहीं करते अपितु जितना सम्भव हो उस व्यक्ति को आगे बढ़ाने में उसकी सहायता ही करते हैं |

और सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि – जैसा आरम्भ में ही लिखा है – सफलता की कामना करने वाला व्यक्ति धैर्य और उत्साह से परिपूर्ण होता है | अपनी स्वयं की भूलों से सीख लेकर साहस के साथ आगे बढ़ता है और सफलता का आनन्द उठता है | ऐसे सफल व्यक्ति अपने कथनों और कार्यों के माध्यम से बिना किसी स्वार्थ के दूसरों का भी धैर्य और साहस बढ़ाने में सहयोग देते हैं… डॉ पूर्णिमा शर्मा 

 

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मानसिक शान्ति

मानसिक शान्ति – जिसकी आजकल हर किसी को आवश्यकता है – चाहे वह किसी भी व्यवसाय से जुड़ा हो, गृहस्थ हो, सन्यासी हो – विद्यार्थी हो – कोई भी हो – हर किसी

Dr. Purnima Sharma
Dr. Purnima Sharma

का मन किसी न किसी कारण से अशान्त रहता है | और हम अपनी मानसिक अशान्ति का दोष अपनी परिस्थितियों तथा अपने आस पास के व्यक्तियों पर – समाज पर – मढ़ देते हैं | कितना भी ब्रह्म मुहूर्त में प्राणायाम, योग और ध्यान का अभ्यास कर लिया जाए, कितना भी चक्रों को जागृत कर लिया जाए – मन की अशान्ति, क्रोध, चिड़चिड़ापन और कई बार उदासी यानी डिप्रेशन भी – जाता ही नहीं | किन्तु समस्या यह है कि जब तक व्यक्ति का मन शान्त नहीं होगा तब तक वह अपने कर्तव्य कर्म भी सुचारु रूप से नहीं कर पाएगा, क्योंकि मन एक स्थान पर – एक लक्ष्य पर स्थिर ही नहीं रह पाएगा | हमने ऐसे लोग देखें हैं जो नियमित ध्यान का अभ्यास करते हैं, प्राणायाम, ध्यान और योग सिखाते भी हैं – लेकिन उनके भीतर का क्रोध, घृणा, लालच, दूसरों को नीचा दिखाने की उनकी प्रवृत्ति में कहीं किसी प्रकार की कमी नहीं दिखाई देती |

अस्तु, मन को शान्त करने के क्रम में सबसे पहला अभ्यास है मन को – अपने ध्यान को – उन बातों से हटाना जिनके कारण व्यवधान उत्पन्न होते हैं या मन के घोड़े इधर उधर भागते हैं | जब तक इस प्रकार की बातें मन में रहेंगी – मन का शान्त और स्थिर होना कठिन ही नहीं असम्भव भी है | इसीलिए पतंजलि ने मनःप्रसादन की व्याख्या दी है |

महर्षि पतंजलि ने ऐसे कुछ भावों के विषय में बताया है जो इस प्रकार की बाधाओं को दूर करने में सहायक होते हैं | ये हैं – मित्रता, करुणा या संवेदना और धैर्य तथा समभाव | निश्चित रूप से यदि मनुष्य इन प्रवृत्तियों को अपने दिन प्रतिदिन के व्यवहार में अपना लेता है तो नकारात्मक विचार मन में आने ही नहीं पाएँगे | किसी भी व्यक्ति के किसी विषय में व्यक्तिगत विचार हो सकते हैं | यदि उसके उन विचारों से किसी को कोई हानि नहीं पहुँच रही है तो हमें इसकी आलोचना करने का या उसे टोकने का कोई अधिकार नहीं | ऐसा करके हम अपना मन ही अशान्त नहीं करते, वरन अपनी साधना के मार्ग में व्यवधान उत्पन्न करके लक्ष्य से बहुत दूर होते चले जाते हैं |

अतः जब भी और जहाँ भी कुछ अच्छा – कुछ आनन्ददायक – कुछ सकारात्मक ऊर्जा से युक्त दीख पड़े – हमें सहज आनन्द के भाव से उसकी सराहना करनी चाहिए और यदि सम्भव हो तो उसे आत्मसात करने का प्रयास भी करना चाहिए, ताकि हमारे मन में वह आनन्द का अनुभव दीर्घ समय तक बना रहे – न कि अपनी व्यक्तिगत ईर्ष्या, दम्भ, अहंकार आदि के कारण उस आनन्ददायक क्षण से विरत होकर उदासी अथवा क्रोध की चादर ओढ़कर एक ओर बैठ जाया जाए | ऐसा करके आप न केवल उस आनन्द के क्षण को व्यर्थ गँवा देंगे, बल्कि चिन्ताग्रस्त होकर अपनी समस्त सम्भावनाओं को भी नष्ट कर देंगे | आनन्द के क्षणों में कुछ इतर मत सोचिए – बस उन कुछ पलों को जी लीजिये | इसी प्रकार जब कभी कोई प्राणी कष्ट में दीख पड़े हमें उसके प्रति दया, करुणा, सहानुभूति और अपनापन दिखाने में तनिक देर नहीं करनी चाहिए | आगे बढ़कर स्नेहपूर्वक उसे भावनात्मक अवलम्ब प्रदान चाहिए |

इस प्रकार चित्त प्रसादन के उपायों का पालन करके कोई भी व्यक्ति मानसिक स्तर पर एकाग्र तथा प्रसन्न अवस्था में रह सकता है | यदि हमारा व्यवहार ऐसा होगा – यदि इन दोनों बातों का अभ्यास हम अपने नित्य प्रति के जीवन में करेंगे – तो हमारा चित्त प्रसन्न रहेगा – और विश्वास कीजिये – इससे बड़ा ध्यान का अभ्यास कुछ और नहीं हो सकता | इस अभ्यास को यदि हम दोहराते रहते हैं तो कोई भी विषम परिस्थिति हमारा चित्त अशान्त नहीं कर पाएगी – किसी भी प्रकार का नकारात्मक विचार हमारे मन में नहीं उत्पन्न होने पाएगा और हमारा मन आनन्दमिश्रित शान्ति का अनुभव करेगा… डॉ पूर्णिमा शर्मा 

 

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Bachpan ki yadein

बचपन की यादें

सुनीता अरोड़ा
सुनीता अरोड़ा

बचपन की वो यादें आज ताज़ा हो गईं |

रात को जब सोते हुए आसमां के तारे गिना करते थे,

और देखते ही देखते गहरी नींद सो जाया करते थे तो,

आज बाहर आकर आसमां की ओर देखा / तो तारे देख,

बचपन की वो यादें ताज़ा हो गईं |

मम्मी पापा के साथ मिलकर काम करते हुए जो खुशी महसूस होती थी,

फिर से वही सब करते हुए उसी खुशी का अनुभव हुआ

और बचपन की वो यादें ताज़ा हो गईं |

परिवार के साथ मिलकर लूडो खेलना,

TV देखना, कैरम बोर्ड खेलना,

फिर से लौट आए,

और बचपन की वो यादें ताज़ा हो गईं |

मम्मी के साथ रसोईघर में हाथ बंटाना,

और देखते ही देखते सब कुछ सीख जाना,

आज अपने बच्चों को देख वह याद आ गया

और बचपन की वो यादें ताज़ा हो गईं |

परिवार के साथ रहकर खुशी को महसूस करना

अपने सुख-दुख को बांटना आनंदित कर गया

और बचपन की वो यादें ताज़ा हो गईं |

सुनीता अरोड़ा

(ये रचना सुनीता अरोड़ा ने लिखी है | सुनीता अरोड़ा WOW India की इन्द्रप्रस्थ ब्रांच की Treasurer होने के साथ ही समाज सेवा के क्षेत्र से भी जुडी हुई हैं | साथ ही ये Haley Star Public School की Principal भी हैं | लिखने का शौक़ रखती हैं, जो इस रचना से पता ही चल रहा है…)

 

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प्रगति का सोपान सकारात्मकता

व्यक्ति के लिए हर दिन – हर पल एक चुनौती का समय होता है | और आजकल के समय में जब सब कुछ बड़ी तेज़ी से बदल रहा है – यहाँ तक कि प्रकृति के परिवर्तन भी बहुत तेज़ी से ही रहे हैं – इस सारे बदलाव और जीवन की भागम भाग के चलते मनुष्य के मन में बहुत सी शंकाएँ अपने वर्तमान और भविष्य को लेकर घर करती जा रही हैं | इन्हीं शंकाओं के कारण हम सब अनेक प्रकार की नकारात्मकताओं के शिकार भी होते जा रहे हैं |

किन्तु इस सबसे घबराकर निष्कर्मण्य होकर बैठ रहना, किसी तनाव का शिकार होकर बैठ रहना या अपने आप पर से विश्वास उठा लेना – कि नहीं, हमसे ये नहीं होगा – ये सब स्वस्थ मानसिकता के लक्षण नहीं हैं | हमें साहस और समझदारी के साथ हर चुनौती का सामना करते हुए आगे बढ़ते रहने का प्रयास करना चाहिए – क्योंकि जीवन गतिशीलता का ही नाम है | और इसका एक ही उपाय है – आशावान बने रहकर हर परिस्थिति में से कुछ सकारात्मक खोजने का प्रयास किया जाए | सकारात्मकता का एक सिरा भी यदि हाथ में आ गया तो उसके सहारे आगे बढ़ने का और उस परिस्थिति या व्यक्ति के अन्य सकारात्मक पक्षों को ढूंढ निकालने का कार्य किया जा सकता है | और यदि अधिक सकारात्मकता नहीं भी दीख पड़ती है – क्योंकि हम स्वयं बहुत सी शंकाओं से घिरे हुए हैं – तो जो सिरा हाथ आया है उसे ही मजबूत बनाने का प्रयास करेंगे तो अन्य नकारात्मकताएँ सकारात्मकता में परिणत होती जाएँगी |

इसका अर्थ यह नहीं हुआ कि परिस्थिति की नकारात्मकताओं के साथ समझौता किया जाए | नहीं, बल्कि उन्हें सकारात्मक बनाने का प्रयास करना है | क्योंकि जीवन में कभी भी सब कुछ सकारात्मक या मनोनुकूल नहीं उपलब्ध होता है | और नकारात्मकताओं के धागे इतने एक दूसरे से बँधे हुए होते हैं कि एक धागे को खींचेंगे तो सारा का सारा आवरण उधड़ता चला जाएगा और तब सारे तार ऐसे उलझ जाएँगे कि उन्हें सुलझाना असम्भव हो जाएगा |

इसीलिए हमारे मनीषियों ने कहा है कि सुख और दुःख, सफलता और असफलता सबमें समभाव रहते हुए कर्तव्य कर्म करते रहना चाहिए | मन को शान्त करने का अभ्यास करते रहना चाहिए | अच्छा बुरा सब पानी के बुलबुले के समान है जो नष्ट होना ही है | हम सबका ध्येय वो बुलबुला नहीं है, उसके पीछे का वो गहरा और अथाह समुद्र है जिसकी हलचल इस सबका कारण है – जिसकी सतह पर ये बुलबुले दीख पड़ते हैं |

सकारात्मकता और नकारात्मकता के फेर में पड़कर हमारी खोज प्रायः उन वस्तुओं या परिस्थितियों पर केन्द्रित होकर रह जाती है जो वास्तविक नहीं हैं और इसी कारण असंतुष्टि का भाव बना रहता है – जो मानसिक तनाव का सबसे बड़ा कारण है |

वास्तव में जिन्हें हम सकारात्मक और नकारात्मक कहते हैं, सफलता और असफलता कहते हैं – उनमें से कुछ भी वास्तविक नहीं है | केवल मात्र हमारे स्वयं के “अहं” – जिसे ईगो कहा जाता है – की सन्तुष्टि और असन्तुष्टि की उपज होती है | या फिर हमारे परिवार, गुरुजनों, समाज आदि ने हमारे मन में कहीं बहुत गहराई में इसे आरोपित कर दिया होता है | जिस दिन हम इस यथार्थ को समझ गए उस दिन न केवल हमारा मन शान्त हो जाएगा, बल्कि हम हर वस्तु, हर व्यक्ति और हर परिस्थिति में समभाव रहकर केवलमात्र सकारात्मक विचारों और भावों के साथ जीना सीख जाएँगे | यह कार्य कठिन हो सकता है, किन्तु अभ्यास करेंगे तो असम्भव भी नहीं होगा…

हम सभी हर परिस्थिति में सकारात्मकता बनाए रखें यही कामना है… क्योंकि जीवन में प्रगति का एक सोपान यही है…

https://shabd.in/post/113630/pragati-ka-sopan-sakaratmakata

 

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Homeopathy – A holistic specialized treatment option

Homeopathy is an individualized mode of treatment which is tailor made for a particular patient. It was discovered more than two hundred years ago by a German doctor Dr. C S F Hahnemann. It is useful for a number of conditions and diseases.

The most interesting part about the treatment is that it can treat you even when you are not diagnosed with an illness but you have a lot of complaints. It can also treat you when you have one or many diseases diagnosed together. The homeopathic doctor asks you a detailed history of your complaints, your past medical history, your family history of diseases and your general symptoms. Based on this detailed history, your personal likes and dislikes, your sleep position etc. the doctor tries to understand what is wrong with your system and how it can be corrected.

The doctor prescribes medicines which have to be taken two or three times a day in pill form. These pills have very low-calorie value and are absolutely safe for diabetics as well. Sometimes weekly medicines are also given to boost your immunity so this prevents you from falling sick also. The doctor can manage your acute diseases as well as chronic diseases together. Regular treatment improves your quality of life and you understand your cause or causes of falling sick. Even if you have mental symptoms or emotional problems, the medicines can remove them without much delay.

The common myth about homeopathy being slow is no longer true because the treatment protocol is designed in a manner to give you speedy recovery. Another lesser known benefit of homeopathy is that it can treat problems which you forget to tell your doctor or which you are unaware of. If the treatment protocol suits you even those complaints that you never discussed would be taken care of over a period of time. This is because homeopathy acts on the functional level and the normal functioning of your organs is achieved.

It boosts your mental, spiritual, physical as well as emotional well-being and is the safest way to rediscover health.

 

 (Dr Priya Kapoor, BHMS, MD (Hom) is the is a Homeopathic consultant with over eighteen years of clinical experience. She is a graduate and post- graduate in Homeopathy from Nehru Homeopathic Medical College and Hospital, University of Delhi and Aurangabad respectively. She has the experience of working with a renowned homeopath Dr. Jugal Kishore for seven years and has been involved in researching and writing books on Homeopathy. She has the experience of working in Pushpanjali Crosslay hospital, now max Superspeciality for last ten years.)

bookmark_borderInternational women’s day program

International women’s day program

WOW India and DGF organized an Award Ceremony in IPEX Bhawan Patparganj on 8 March on the occasion of International Women’s Day with a colorful event. Program was hosted by the Cultural Secretary of WOW India Mrs. Leena Jain. Here is the Rashtragan by the Government Body members of WOW India…

https://youtu.be/FEc9KzjcA0A

 

WOW India and DGF organized an Award Ceremony in IPEX Bhawan Patparganj on 8 March on the occasion of International Women’s Day with a colorful event. Program was hosted by the Cultural Secretary of WOW India Mrs. Leena Jain. Here, Dr. Purnima Sharma, Secretary General giving an introduction of the program…

https://youtu.be/k2bl7lBQ3XM

 

WOW India and DGF organized an Award Ceremony in IPEX Bhawan Patparganj on 8 March on the occasion of International Women’s Day with a colorful event. Program was hosted by the Cultural Secretary of WOW India Mrs. Leena Jain. On this occasion, Dr. Sharada Jain, Chairperson of WOW India, expressed her views on the empowerment of women…

https://youtu.be/3XJMe9L454o

 

WOW India and DGF organized an Award Ceremony in IPEX Bhawan Patparganj on 8 March on the occasion of International Women’s Day with a colorful event. Program was hosted by the Cultural Secretary of WOW India Mrs. Leena Jain. On this occasion, Dr. S. Lakshmi Devi, President of WOW India informed the audience about the journey of WOW India from the beginning till now…

https://youtu.be/bVaD7Amz0rI

bookmark_borderReport of Women’s Day Program

Report of Women’s Day Program

आठ मार्च को अईपैक्स भवन पटपरगंज में WOW India और DGF के द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रंगारंग कार्यक्रम के बीच Award Ceremony का आयोजन किया गया | कार्यक्रम का विषय था महिलाओं की सुरक्षा और इसी विषय पर एक छोटे से संवाद के साथ WOW India के सदस्यों ने कार्यक्रम का आरम्भ किया |

Dr. Purnima Sharma
Dr. Purnima Sharma

WOW India की सेक्रेटरी जनरल डॉ पूर्णिमा शर्मा के कॉन्सेप्ट स्क्रिप्ट को WOW India की कल्चरल सेक्रेटरी लीना जैन के निर्देशन में प्रेसीडेंट डॉ एस लक्ष्मी देवी के साथ मिलकर बानू बंसल, डॉ रूबी बंसल, डॉ प्रिया कपूर, डॉ दीपिका कोहली, डॉ रश्मि जैन, डॉ इंदु त्यागी, सरिता रस्तोगी और सुषमा अग्रवाल ने बड़े अच्छे से पूर्ण ऊर्जा के साथ प्रस्तुत किया | उसके बाद WOW India की Chairperson डॉ शारदा जैन ने महिला सशक्तीकरण के विषय में अपने विचार व्यक्त किये और WOW India की President डॉ एस लक्ष्मी देवी ने WOW India की आरम्भ से लेकर अभी तक की यात्रा के विषय में दर्शकों को अवगत कराया | कार्यक्रम का सफल संचालन लीना जैन ने किया |

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण था परम पूज्या दीदी माँ साध्वी ऋतम्भरा जी को सुनना | दीदी माँ ने वैदिक काल से लेकर रामायण महाभारत काल से होते हुए आधुनिक काल तक की नारियों की यात्रा के सारगर्भित वर्णन के साथ ही महिलाओं को सुझाव भी दिया कि हमें अपने घर में बच्चों को संस्कारित करने की आवश्यकता है ताकि महिलाओं के साथ दिन प्रतिदिन होते रहने वाले अपराधों में कभी तो कमी आए | दीदी माँ का कहना था कि सदा लड़कियों को ही क्यों टोका जाता है उनके वस्त्रों के लिए, उनके कार्य के लिए ? इसके बजाए आवश्यकता है हमें अपने परिवारों में बचपन से ही संस्कारों की डालने की ताकि ऐसी कोई समस्या ही उत्पन्न न हो, और एक माँ इस कार्य को जितनी दृढ़ता तथा भावुकता के साथ कर सकती है उतनी दृढ़ता और भावुकता के साथ कोई अन्य इस कार्य को नहीं कर सकता |

कार्यक्रम में जयपुर घराने की विश्व प्रसिद्ध कत्थक नृत्यांगना सुश्री प्रेरणा श्रीमाली को शास्त्रीय नृत्य के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए Women’s Day Legendary Award से सम्मानित किया गया | संगीत जैसी कलाओं के क्षेत्र में आज के युग में भी संगीत प्रशिक्षण के महत्त्वपूर्ण अंग “गुरु-शिष्य परम्परा” को जीवित बनाए रखने वाले कुछ प्रसिद्ध गुरुओं में प्रेरणा जी की गणना की जाती है | इस अवसर पर बोलते हुए प्रेरणा जी का भी यही प्रश्न था कि विश्व की आधी आबादी यानी महिलाओं को पुरुषों से कम करके क्यों आँका जाता है ? अभी भी क्यों बहुत से स्थानों पर लड़कियों के शाम के बाद घर से बाहर निकलने पर रोक लगा दी जाती है ? और यदि उन्हें जाना भी हो भाई साथ में जाएगा – भले ही वह भाई उनसे दस बरस छोटा ही क्यों न हो ? वास्तव में ये ऐसे ज्वलन्त प्रश्न हैं कि इनके उत्तर तो हम सबको मिलकर खोजने ही होंगे |

इसके अतिरिक्त महिलाओं के स्वास्थ्य के क्षेत्र में सराहनीय योगदान के लिए अत्यन्त योग्य डॉ दीप्ति नाभ को Excellence Award से सम्मानित किया गया | डॉ नाभ Senior Consultant Obstetrician & Gynaecologist & Infertility Expert हैं |

सुश्री योगिता भयाना को समाज सेवा के क्षेत्र में उनके द्वारा किया जा रहे महिलाओं से सम्बन्धित कार्यों के लिए – विशेष रूप से बलात्कार से पीड़ित महिलाओं के लिए जो कार्य वे कर रही हैं उसके लिए – Excellence Award से सम्मानित किया गया | सुश्री भयाना ने हाल ही में UN में अपील की है कि निर्भया काण्ड के चारों दरिन्दों को जिस दिन फाँसी पर लटकाया जाएगा उस दिन को अन्तर्राष्ट्रीय महिला सुरक्षा दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की जाए |

संगीत और कला के क्षेत्र में Excellence Award दिया गया प्रसिद्ध उड़ीसी नृत्यांगना आम्रपाली गुप्ता जी को जिन्हें नृत्य की विधा परम्परागत रूप में विरासत में अपनी पूज्या माता जी से प्राप्त हुई |

इनके अतिरिक्त कुछ Appreciation Awards भी दिए गए | जिनमें: डॉ मीनाक्षी शर्मा को स्वास्थ्य के क्षेत्र में, योजना विहार शाखा की श्रीमती बिमलेश अग्रवाल, इन्द्रप्रस्थ शाखा की श्रीमती सुनीता अरोड़ा और अईपैक्स ब्रांच की श्रीमती वन्दना वर्मा को समाज सेवा के क्षेत्र में, सूर्य नगर ब्रांच की श्रीमती रेखा अस्थाना को शिक्षा के क्षेत्र में तथा इन्द्रप्रस्थ ब्रांच की ही श्रीमती राजेश्वरी भार्गव को संगीत और नृत्य के क्षेत्र में Appreciation Awards से सम्मानित किया गया | सूर्य नगर ब्रांच की श्रीमती सविता कृपलानी और इन्द्रप्रस्थ ब्रांच की Study Seven seas नाम से विदेशों में मेडिकल के पढ़ाई के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए Consultancy Services देने वाली श्रीमती पारुल शर्मा को Best Coordinator के रूप में सम्मानित किया गया | सूर्यनगर तथा इन्द्रप्रस्थ शाखाओं को विभिन्न क्षेत्रों में बेस्ट ब्रांच का अवार्ड दिया गया |

सभी ब्रान्चेज़ की सदस्यों ने तथा Delhi Gynaecologist Forum की मेम्बर्स ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किये जिन्हें देखकर खचाखच भरे हॉल में दर्शकगण भी झूमे बिना न रह सके | सबसे आकर्षक कार्यक्रम रहा आम्रपाली गुप्ता जी की दो शिष्याओं अनुप्रिया शर्मा और साँवरी सिंह के शास्त्रीय नृत्य जिनमें आम्रपाली जी के ही नृत्य की झलक देखने को मिली |

खाना और चाट तो स्वाद थी ही जिसका सभी ने लुत्फ़ उठाया | कुल मिलाकर कार्यक्रम बेहद उल्लासमय, उत्साहमय और सफल रहा | 

डॉ पूर्णिमा शर्मा

bookmark_borderHappy Women’s Day

Happy Women’s Day

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस की सभी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ

सारी की सारी प्रकृति ही नारीरूपा है – अपने भीतर अनेकों रहस्य समेटे – शक्ति के अनेकों स्रोत समेटे – जिनसे मानवमात्र प्रेरणा प्राप्त करता है… और जब सारी प्रकृति ही

Dr. Purnima Sharma
Dr. Purnima Sharma

शक्तिरूपा है तो भला नारी किस प्रकार दुर्बल या अबला हो सकती है ?

आज की नारी शारीरिक, मानसिक, अध्यात्मिक और आर्थिक हर स्तर पर पूर्ण रूप से सशक्त और स्वावलम्बी है और इस सबके लिए उसे न तो पुरुष पर निर्भर रहने की आवश्यकता है न ही वह किसी रूप में पुरुष से कमतर है |

पुरुष – पिता के रूप में नारी का अभिभावक भी है और गुरु भी, भाई के रूप में उसका मित्र भी है और पति के रूप में उसका सहयोगी भी – लेकिन किसी भी रूप में नारी को अपने अधीन मानना पुरुष के अहंकार का द्योतक है | हम अपने बच्चों को बचपन से ही नारी का सम्मान करना सिखाएँ चाहे सम्बन्ध कोई भी हो… पुरुष को शक्ति की सामर्थ्य और स्वतन्त्रता का सम्मान करना चाहिए…

देखा जाए तो नारी सेवा और त्याग का जीता जागता उदाहरण है, इसलिए उसे अपने सम्मान और अधिकारों की किसी से भीख माँगने की आवश्यकता नहीं…

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस की सभी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ – इस आशा और विश्वास के साथ कि हम अपने महत्त्व और प्रतिभाओं को समझकर परिवार, समाज और देश के हित में उनका सदुपयोग करेंगी…

इसी कामना के साथ सभी को आज का शुभ प्रभात…

मुझमें है आदि, अन्त भी मैं, मैं ही जग के कण कण में हूँ |

है बीज सृष्टि का मुझमें ही, हर एक रूप में मैं ही हूँ ||

मैं अन्तरिक्ष सी हूँ विशाल, तो धरती सी स्थिर भी हूँ |

सागर सी गहरी हूँ, तो वसुधा का आँचल भी मैं ही हूँ ||

मुझमें है दीपक का प्रकाश, सूरज की दाहकता भी है |

चन्दा की शीतलता मुझमें, रातों की नीरवता भी है ||

मैं ही अँधियारा जग ज्योतित करने हित खुद को दहकाती |

और मैं ही मलय समीर बनी सारे जग को महका जाती ||

Happy Women's Day
Happy Women’s Day

मुझमें नदिया सा है प्रवाह, मैंने न कभी रुकना जाना |

तुम जितना भी प्रयास कर लो, मैंने न कभी झुकना जाना ||

मैं सदा नई चुनती राहें, और एकाकी बढ़ती जाती |

और अपने बल से राहों के सारे अवरोध गिरा जाती ||

मुझमें है बल विश्वासों का, स्नेहों का और उल्लासों का |

मैं धरा गगन को साथ लिये आशा के पुष्प खिला जाती ||

डॉ पूर्णिमा शर्मा