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bookmark_borderRecipe of Amle ka Halwa

Recipe of Amle ka Halwa

Rekha Asthana
Rekha Asthana

आँवले का हलवा और कार्तिक पूर्णिमा – रेखा अस्थाना

आँवले के गुणों के विषय में तो हम सभी जानते हैं | और ठण्ड के मौसम में जब ताज़ा ताज़ा आँवला आता है तब तो कई तरह से उसे काम में लिया जाता है | इसी तरह से आज हम बनाते हैं आँवले का हलवा… स्वास्थ्यवर्द्धक भी और खाने में स्वाद भी…

  • सामग्री :
  • आधा किलो आँवला
  • चीनी आधा किलो (पर यह आपके स्वाद पर भी निर्भर करता है)
  • एक टुकड़ा दालचीनी
  • एक छोटी इलायची
  • एक लौंग लें पीस कर पाउडर बना कर रख लें
  • एक बड़ा चम्मच देसी घी |
  • विधि :
  • आँवले को थोड़ा पानी डालकर स्टीम दें | तीन स्टीम के बाद उतार कर, ठण्डा होने पर उसकी गुठली अलग कर उसे मिक्सी में पीस लें | कढ़ाई गर्म कर उसमें घी डालें और पीसे आँवले को खूब भूनें |
  • इधर चीनी की एक तार की चाशनी बनाकर तैयार रखें | जब आँवले का पानी सूख जाए तब उस चाशनी को आँवले के पेस्ट में डालकर चलाएँ | फिर चुटकी भर जो आपने मसाला बनाया था डालकर खूब चलाएँ | सूखने पर उतार लें |
  • बर्फी की विधि :

अब अगर आप इसी पेस्ट में भुना हुआ सिंघाड़े का आटा मिला देंगे तो यह थोड़ा कड़ा पड़ जाएगा | इन दोनों को अच्छे से मिलाएँ | उसे आप थाली में घी लगा कर जमाकर बर्फी का आकार दे सकती हैं | ऊपर से ड्राईफ्रूट्स से डेकोरेट भी कर सकती हैं |

  • फायदे :
  • इसमें प्रचुर मात्रा में आयरन, कैल्शियम, व विटामिन सी होता है | इसे आप रोटी, पराठे या फिर ब्रेड में लगाकर बच्चों को दे सकती हैं | यह रक्त की कमी की पूर्ति कर आँखों की रोशनी के लिए भी फायदेमंद है | नियमित उपयोग से बाल झड़ने बंद हो जाते हैं |

    Different uses of Amla
    Different uses of Amla
  • थोड़ा कसैला अवश्य रहता है पर गुणकारी सोने के समान है |
  • शुगर पेशेंट्स चीनी का उपयोग सोच समझ कर करें |
  • बुजुर्गों की कहावत :

बुजुर्गों का कहा और आँवले का खाया बाद में नजर आता है |

  • सामाजिक दायित्व :
  • कार्तिक मास भर संपन्न व्यक्ति को किसी न किसी रूप में आँवले का दान गरीबों को अवश्य करें क्योंकि वे खरीद कर नहीं खा पाते | छठपूजा में भी आँवला चढ़ता है और प्रसाद रूप में सभी को दिया भी जाता है |
  • एक आँवले का गुण एक तोले सोने के समान है |

किसी भी प्रकार की मेरी त्रुटि के लिए क्षमा👏हम फिर मिलेंगे आँवले के साथ किसी अन्य रूप में |

रेखा अस्थाना

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Amla ki Chutney

कार्तिक, अगहन और पूस

Rekha Asthana
Rekha Asthana

खाओ आँवले की चटनी और पीयो तरकारी का गर्म सूप

प्रकृति – वह भी भारत देश की – जहाँ नाना प्रकार की साग सब्जियाँ व फल होते हैं जो शरीर के लिए औषधि का कार्य करते हैं पर हमें सही जानकारी न होने के कारण हम इनका इस्तेमाल कम करते हैं | हमारे बुजुर्ग कहा करते थे कि अगर हम केवल मौसमी फलों और साग सब्ज़ियों का ही भोजन में प्रयोग करें तो रोगों से कोसों दूर रह सकते हैं | आजकल आँवलो पर बहार आई हुई है… जी हाँ, आँवलों का मौसम चल रहा है और आँवले स्वास्थ्य के लिए कितने अधिक उपयोगी होते हैं ये हम सभी जानते हैं | कई तरह से आँवलों का प्रयोग किया जाता है | और अगर उनकी चटनी बनाकर खाई जाती है तब तो सेहत के साथ साथ खाने का स्वाद भी दोगुना बढ़ जाता है… तो आइये आज मैं आपको आँवले की चटनी प्रतिदिन खाने के लिए बनाने की विधि बता रही हूँ…

  • सामग्री
  • आँवले चार – काटकर गुठली अलग करें व बारीक टुकड़ों में काट लें
  • हरी धनिया पचास ग्राम
  • लहसुन यदि खाते हों तो पाँच कली छीलकर
  • हरी मिर्च सात या आठ या फिर स्वादानुसार
  • दो चम्मच सफेद सूखे तिल (तवे में हल्के लाल कर हल्का सा पीस लें)

    Recipe of Amla ki Chutney
    Recipe of Amla ki Chutney
  • एक चम्मच ऑलिव ऑइल यदि हो तो
  • नमक स्वादानुसार
  • विधि— इस सारी सामग्री को अच्छी प्रकार धोकर मिक्सी में पीसकर एक छोटे जार में रखें फिर उसमें भुने दरबराए तिल व ऑलिव ऑइल को मिलाकर रखें | प्रतिदिन अपने प्रियजन को प्रेम से परोसें |
  • फायदे— आपको सर्दी-जुकाम से दूर रखे, इम्यून सिस्टम ठीक रखेगा, शरीर में आयरन व कैल्शियम की कमी को पूरा करेगा । बाल आँखों के लिए  हितकर |

रोज खाइए और खिलाइए | क्योंकि यह बिना बताए पुण्य का बैलेंस बढ़ाता जाता है | जब हम स्वस्थ रहेंगे तो देश पर बोझ नहीं बनेंगे न |

“बुजुर्गों की गाथा व आँवले का खाया” बाद में पता चलता है |

और हाँ, त्रुटि के लिए क्षमा करियेगा क्योंकि डाक्टर हमसे अधिक  जानते हैं।👏😊

रेखा अस्थाना

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Navaratri Special Falahari Recipes

फलों का बुके

आज चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी भगवती के महागौरी रूप की उपासना का दिन और कल नवमी को सिद्धिदात्री देवी की उपासना की जाएगी | कुछ परिवारों में अष्टमी को कन्या पूजन के साथ नवरात्र सम्पन्न हो जाते हैं और कुछ परिवारों में नवमी को समापन किया जाता है | ये भी सभी जानते हैं कि नवरात्रों में लगभग प्रत्येक घर में फलाहार ही ग्रहण किया जाता है | हम पिछले कुछ दिनों से अपने WOW India के सदस्यों द्वारा भेजी हुई भारतीय परम्परा के अनुसार बनाए जाने वाले फलाहारी पकवानों की रेसिपीज़ आपके साथ साँझा कर रहे हैं | तो जिन लोगों का आज भी व्रत है उनके लिए प्रस्तुत है एक बिल्कुल ही नई रेसिपी… पुष्पगुच्छ यानी फूलों के बुके तो प्रायः प्रत्येक कार्यक्रम में अतिथियों को भेंट किये जाते हैं… शादी ब्याह या ऐसे ही किसी विशेष उत्सव में जाते हैं तो वहाँ भी इसी प्रकार फूलों के बुके लेकर जाने का प्रचलन है… चॉकलेट्स के बुके भी देखने को मिल जाते हैं… फलों के बहुत ख़ूबसूरती से सजाए गए टोकरे भी सभी लोग प्रयोग में लाते हैं… लेकिन फूलों के बुके सूख जाने पर फेंकने पड़ते हैं… क्या ही अच्छा हो यदि हम ताज़े फलों के बुके बनाकर भेंट करें… फल तो खाने के काम में आ ही जाएँगे… स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होने फलों के बुके… और नवरात्रों में तो विशेष रूप से फलाहार के काम आएँगे… लेकिन कैसे…? तो आइये सीखते हैं अर्चन गर्ग जी से फलों के बुके बनाने की विधि… डॉ पूर्णिमा शर्मा…

सामग्री…

  • आधा अनानास नीचे का हिस्सा ऊपर का हिस्सा पत्ते वाला काट के आधा अलग रख लें

    अर्चना गर्ग
    अर्चना गर्ग
  • आधा खरबूजा
  • आधा तरबूज
  • 200 ग्राम काले अंगूर
  • 200 ग्राम हरे अंगूर
  • 200 gram strawberry
  • दो संतरे की फाक

बनाने की विधि…

सारे फलों के छिलके उतार दीजिए | अंगूर और स्ट्रोबेरी का छिलका नहीं उतरेगा उसको ऐसे ही छोड़ दीजिए | कटे हुए फलों को आप किसी भी आकार में काट सकती हैं – जैसा कि मैंने ऊपर आपको फोटो में दिखाया है | स्ट्रोबेरी अगर पहले आपने लाल लगाया है तो फिर उसके ऊपर सफेद लगाएं उसके ऊपर काला लगाएं इस तरह रंग बिरंगे फ्रूट्स के साथ इसको सजाएं | अब लकड़ी की डंडी में यह सब डाल के जो हमने अनानास का ऊपर का हिस्सा काटा था उसमें यह सब लकड़ी की डांडिया लगा दीजिये | इनको Skewers भी बोलते हैं | सारे फ्रूट्स डंडियों में लगाकर अनानास का जो ऊपर का हिस्सा है उसमें सब लगा दीजिए | जो कटे फल बच जाएँ तो उन्हें बचे हुए तरबूज को खाली करके उसका एक टोकरी सी बनाकर उसमें भर के टेबल पर रख दें | वह इसी तरह खा लिए जाएंगे | तो देखा आपने कितना सुंदर बुके तैयार हो गया हमारा आप खुद भी बनाइए और देखिए कैसा लगता है…

_______________अर्चना गर्ग

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Navaratri Special Falahari Recipes

नवरात्रि स्पेशल फलाहारी व्यंजन

“एतत्ते वदनं सौम्यं लोचनत्रय भूषितं, पातु नः सर्वभीतेभ्यः कात्यायनी नमोSस्तु ते |”

जैसा कि सब ही जानते हैं चैत्र नवरात्र चल रहे हैं और हर घर में माँ भगवती के नौ रूपों की पूजा अर्चना की जा रही है | आज चैत्र शुक्ल षष्ठी – यानी छठा नवरात्र है – देवी के कात्यायनी रूप की उपासना का दिन | इनकी उपासना से चारों पुरुषार्थ – धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष – की सिद्धि होती है | यजुर्वेद के तैत्तिरीय आरण्यक में सर्वप्रथम इनका उल्लेख उपलब्ध होता है | देवासुर संग्राम में देवताओं का कार्य सिद्ध करने के लिये – महिषासुर जैसे दानवों का संहार करने के लिए – देवी कत ऋषि के पुत्र महर्षि कात्यायन के आश्रम पर प्रकट हुईं और महर्षि ने उन्हें अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार किया | इसीलिये “कात्यायनी” नाम से उनकी प्रसिद्धि हुई | इस प्रकार देवी का यह रूप पुत्री रूप है | यह रूप निश्छल पवित्र प्रेम का प्रतीक है | किन्तु साथ ही यदि कहीं कुछ भी अनुचित होता दिखाई देगा तो ये कभी भी भयंकर क्रोध में भी आ सकती हैं | स्कन्द पुराण में उल्लेख है कि वे परमेश्वर के नैसर्गिक क्रोध से उत्पन्न हुई थीं और बाद में पार्वती द्वारा प्रदत्त सिंह पर आरूढ़ होकर महिषासुर का वध किया था | पाणिनि पर पतंजलि के भाष्य में इन्हें शक्ति का आदि रूप बताया गया है | देवी भागवत और मार्कण्डेय पुराणों में इनका माहात्म्य विस्तार से उपलब्ध होता है | कात्यायनी देवी के रूप में माँ भगवती सभी की रक्षा करें और सभी की समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण करें…

नौ दिन चलने वाले नवरात्रों में लगभग प्रत्येक घर में फलाहार ही ग्रहण किया जाएगा | हम पिछले कुछ दिनों से अपने WOW India के सदस्यों द्वारा भेजी हुई भारतीय परम्परा के अनुसार बनाए जाने वाले फलाहारी पकवानों की रेसिपीज़ आपके साथ साँझा कर रहे हैं | इसी क्रम में आज रेखा अस्थाना जी की भेजी हुई दो रेसिपीज़ प्रस्तुत कर रहे हैं – पहली रेसिपी है सामख के चावल का पुलाव, और दूसरी है शकरकन्दी का पाग… अब भई नमक का खाने के बाद कुछ मीठा भी तो चाहिए होता है न… तो आइये सीखते हैं कैसे बनाई जाती हैं ये दोनों चीज़ें… डॉ पूर्णिमा शर्मा…

सावां या सामख के चावल का पुलाव

बचपन में दादी माँ कहा करती थी यह चावल प्रकृति की देन है, बिना बोये जोते इसको प्राप्त किया जा सकता है |

तो आज हम आपको फलाहारी पुलाव बनाना बता रहें हैं | एक बात का ध्यान रहे जब आप संध्या की आरती कर चुके व व्रत के पारायण का समय हो तभी इसे बनवाइएगा |

Pulao of Samakh Rice
Pulao of Samakh Rice

अन्यथा यह एक दूसरे से चिपक जाता हैं | वैसे भी व्रत के नियम के अनुसार पारायण के समय जितना खा पाए उतना ही लें, रख उठाकर न खाएँ |

सामग्री…

  • सावां के चावल एक कटोरी ।
  • आलू एक बड़ा
  • हरी मिर्च
  • एक चम्मच जीरा साबुत
  • एक चम्मच देसी घी
  • हरी धनिया
  • अदरख कद्दूकस किया हुआ एक चम्मच
  • सेंधा नमक स्वादानुसार

चावल को धो लें | आलू को छील कर बारीक काट लें | अब कुकर में एक चम्मच देसी घी डालकर जीरा तड़का लें | उसके बाद हरी मिर्च व अदरख डालें | फिर चावल व आलू डालें | सेंधा नमक डालकर चलाएँ | अन्दाज़ से पानी डालें | ढक्कन बन्द करके एक सीटी में उतार लें | फिर हरी धनिया डालें | अगर पसन्द हो तो देसी घी डालकर दही या चटनी के साथ आप खा सकती हैं | आप चाहें तो पपीते के रायते के साथ भी खा सकती हैं |

और अब कुछ मीठा हो जाए… तो बनाते हैं शकरकंदी पाग…

Sweet Chips of Sweet Potato
Sweet Chips of Sweet Potato

सामग्री…

  • शकरकंद 250ग्रा०
  • चीनी चार टी स्पून
  • अमचूर एक टी स्पून
  • सोंठ एक चम्मच
  • सेंधा नमक एक टी स्पून
  • सूखी साबुत लाल मिर्च दो
  • जीरा एक टी स्पून
  • थोड़ी किशमिश

बनाने की विधि…

शकरकंद को धोकर छील लें फिर गोल गोल काट लें – न बहुत पतले न मोटे |

एक पैन में एक चम्मच घी डालकर उसमें नमक, सोंठ, अमचूर, चीनी व किशमिश डालकर एक कप पानी डालें और शकरकन्दी डालकर चलाकर ढक दें | तब तक पकायें जब तक शकरकंद दबने न लगे | अधिक गलाए नहीं नहीं तो स्वाद बेकार हो जाता है |

इसे आप किसी भी फलाहार व्यंजन के साथ खा सकती हैं |

________________रेखा अस्थाना

 

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Navaratri Special Falahari Recipes

नवरात्रि स्पेशल फलाहारी व्यंजन  

जैसा कि सब ही जानते हैं चैत्र नवरात्र चल रहे हैं और हर घर में माँ भगवती के नौ रूपों की पूजा अर्चना की जा रही है | आज चैत्र शुक्ल पञ्चमी – यानी पञ्चम नवरात्र है – देवी के स्कन्दमाता रूप की उपासना सबने की है | छान्दोग्यश्रुति के अनुसार भगवती की शक्ति से उत्पन्न हुए सनत्कुमार का नाम स्कन्द है, और उन स्कन्द की माता होने के कारण ये स्कन्दमाता कहलाती हैं | इसीलिये यह रूप एक उदार और स्नेहशील माता का रूप है |

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः |

जब धरती पर राक्षसों का अत्याचार बढ़ता है माता अपने भक्तों की रक्षा करने के लिए सिंह पर सवार होकर दुष्टों का नाश करने निकल पड़ती हैं | युद्ध के लिए निकलना है लेकिन पुत्र के प्रति अगाध स्नेह भी है, माँ के कर्तव्य का भी निर्वाह करना है, इसलिए युद्धभूमि में भी सन्तान को साथ ले जाना आवश्यक हो जाता है एक माँ के लिए | साथ ही युद्ध में प्रवृत्त माँ की गोद में जब पुत्र होगा तो उसे बचपन से ही संस्कार मिलेंगे कि आततायियों का वध किस प्रकार किया जाता है – क्योंकि सन्तान को प्रथम संस्कार तो माँ से ही प्राप्त होते हैं – इन सभी तथ्यों को दर्शाता देवी का यह रूप है |  

नवरात्रों में लगभग प्रत्येक घर में फलाहार ही ग्रहण किया जाएगा | हम पिछले कुछ दिनों से अपने WOW India के सदस्यों द्वारा भेजी हुई भारतीय परम्परा के अनुसार बनाए जाने वाले फलाहारी पकवानों की रेसिपीज़ आपके साथ साँझा कर रहे हैं | इसी क्रम में आज हम दो रेसिपी प्रस्तुत कर रहे हैं… मखाने तो हाँ सब ही बड़े चाव से खाते हैं… कभी भून कर नमक लगाकर, तो कभी ऐसे ही बिना भुने… कभी तलकर तो कभी खीर बनाकर… अनेक प्रकार से मखानों का सेवन हम करते हैं… पर क्या आपने कभी मखाने की पूरी बनाकर खाई हैं…? नहीं…? तो आइये आज सीखते हैं अर्चना गर्ग जी से… भई कुट्टू और रागी आदि की पूरियाँ तो बहुत खा लीं व्रत के दिनों में… आज मखाने की पूरी खाते हैं… स्वास्थ्य के लिए भी मखाने बहुत लाभकारी होते हैं… डॉ पूर्णिमा शर्मा…

मखाने के पराँठे या पूरी के लिए सामग्री…

Fox Nut Puri
Fox Nut Puri
  • हम मखानों में से बिना फूले हुए मखाने चुन लेते हैं – जिन्हें ठुड्डी कहा जाता है | | इसको हम मिक्सी में महीन पीस लेते हैं | उसके बाद इसको चलनी से छान के ऊपर का मोटा वाला आटा यानी चोकर अलग कर देंगे और नीचे का बारीक वाले आटे से हम पूरियाँ बनाएँगे | तो ये दो कटोरी आटा
  • दो आलू उबले हुए मीडियम साइज के
  • थोड़ा देसी घी पूरी तलने के लिए
  • आधा चम्मच सेंधा नमक

बनाने की विधि…

एक बाउल में आटा ले लिया | दो उबले हुए आलू अच्छे से कद्दूकस करके मैश कर लिए और उसमें नमक डाल दिया। अब उसमें थोड़ा थोड़ा पानी डालकर उसका रोटी जैसा आटा सान लिया | मखाने का आटा फूलता बहुत है इसका ध्यान रखना है | इसको 15 मिनट ढक के रख दिया | 15 मिनट बाद देखा अगर वह खड़ा है तो थोड़ा सा पानी और डालकर उसको मुलायम दो | अब जैसे हम रोटी की लोई बनाते हैं ऐसे सब लोई तोड़ कर रख ले | चकले पे जरा सा मखाने का आटा डाला, उसके ऊपर लोई रखी और जरा सा आटा और डाला और धीरे-धीरे उसको हाथ से भी थपक सकते हैं और बेलन से भी बोल सकते हैं | छोटी-छोटी पराठे तैयार करके तवे पर डाल दिया | देसी घी लगा लगा कर अच्छा गोल्डन ब्राउन दोनों तरफ से सेंक लिया | यह खाने में बहुत ही स्वादिष्ट लगता है | आप इसे चाहे तो पूरी की तरह भी तल सकते हैं | लेकिन घी काफी लग जाता है उसमें | पराठे बहुत स्वाद लगते हैं | न्यूट्रीशन वैल्यू बहुत है – जैसा कि सभी को मालूम है कि मैं खाने में कितने गुण होते हैं |

 

दही की अरबी के लिए सामग्री…

मखाने की पूरी या पराँठे तो हमने तैयार कर लिए, लेकिन इन्हें खाएँगे किसके साथ ? क्यों न दही वाली अरबी बनाई जाएँ… इसके लिए…

  • आधा किलो उबली हुई अरबी
  • 1 कटोरी दही हल्की खट्टी
  • नमक स्वादानुसार
  • एक बड़ा चम्मच देसी घी

    Dahi ki arbi
    Dahi ki arbi
  • दो हरी मिर्च
  • चौथाई कप कटा हुआ बारीक हरा धनिया
  • आधा चम्मच गरम मसाला
  • दो कप पानी

बनाने की विधि…

कढ़ाई में घी डाला | उसके बाद उसमें दही डाला और सारे मसाले डाल दिए | उसे लगातार चलाते रहें नहीं तो दही फट जाएगी | अब उसमें उबली हुई अरबी दो दो पीस काट कर डाल दिए और उसे चलाते रहे | फिर दो कप पानी डाल दिया | जब वह अच्छे से खनक जाए तो लटपट दही की अरबी हमारी तैयार हो गई |

यह मखाने की पूरी के साथ या पराठे के साथ बहुत ही स्वादिष्ट लगती है तो लीजिए हमारा व्रत का खाना तैयार है आप भी खाइए दूसरों को भी खिलाइए और बताइए कैसा लगा आपको यह खाना…

_____________________अर्चना गर्ग

 

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Navaratri Special Falahari Recipes

नवरात्रि स्पेशल – फलाहारी रेसिपीज़

जैसा कि सब ही जानते हैं चैत्र नवरात्र चल रहे हैं और हर घर में माँ भगवती के नौ रूपों की पूजा अर्चना की जा रही है | आज चैत्र शुक्ल तृतीया – यानी तीसरा नवरात्र है – देवी के चन्द्रघंटा रूप की उपासना का दिन | देवी कूष्माण्डा – सृष्टि की आदिस्वरूपा आदिशक्ति | इनका निवास सूर्यमण्डल के भीतरी भाग में माना जाता है | अतः इनके शरीर की कान्ति भी सूर्य के ही सामान दैदीप्यमान और भास्वर है | इनके तेज और प्रकाश से दसों दिशाएँ प्रकाशित हो रही हैं | ब्रह्माण्ड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में अवस्थित तेज इन्हीं की छाया है | कुत्सितः ऊष्मा कूष्मा – त्रिविधतापयुतः संसारः, स अण्डे मांसपेश्यामुदररूपायां यस्याः स कूष्माण्डा – अर्थात् त्रिविध तापयुक्त संसार जिनके उदर में स्थित है वे देवी कूष्माण्डा कहलाती हैं…

नौ दिन चलने वाले नवरात्रों  में लगभग प्रत्येक घर में फलाहार ही ग्रहण किया जाएगा | हम पिछले कुछ दिनों से अपने WOW India के सदस्यों द्वारा भेजी हुई भारतीय परम्परा के अनुसार बनाए जाने वाले फलाहारी पकवानों की रेसिपीज़ आपके साथ साँझा कर रहे हैं | इसी क्रम में आज प्रस्तुत कर रहे हैं कुट्टू के आटे की पूरी अमरूद की सब्ज़ी के साथ… जो हमें भेजी है रेखा अस्थाना जी ने… और उसके बाद मीठे के लिए अरबी के गोंद की रेसिपी… अरबी का गोंद…? जी, सही पढ़ा आपने… अरबी का गोंद… जो हमें सिखाएँगी अर्चना गर्ग जी… तो पहले बनाते हैं कुट्टू की पूरी के साथ अमरूद की सब्ज़ी… डॉ पूर्णिमा शर्मा…

कुट्टू के आटे की पूरी (पूड़ी )के साथ अमरूद की सब्जी

सभी कुट्टू की पूरी बनाना जानते हैं | पर आपको मैं फिर से बनाना बता रही हूँ…

सामग्री…

  • कुट्टू का आटा 250 ग्रा०, आटे को हमेशा छलनी से छान लिया करें
  • आलू या अरबी (चार ) उबले हुए
  • सेंधा नमक स्वादानुसार

    Sabzi puri
    Sabzi puri
  • तलने के लिए रिफाइंड

बनाने की विधि…

उबले हुए आलू या अरबी को छीलकर मसल लें | अब कुट्टू के आटे में नमक और ये मैश किये हुए आलू या अरबी मिलाकर आटे को सख्त सा सान लें | ध्यान रहे जब व्रत खोलना हो उसके कुछ समय पूर्व ही आटा साने | पहले से सानने से आटा बेकार हो जाता है | ढीला पड़ जाता है फिर पूड़ी बिलती नहीं है | कड़े आटे की पूड़ी ख़स्ता होती है | अब इस आटे की लोई बनाकर रख लें और एक एक करके पूड़ियाँ तलकर निकाल लें | आप इन्हें दही के साथ भी परोस सकते हैं और अमरूद की सब्ज़ी के साथ तो ये बेहद स्वाद लगती हैं |

तो अब बनाते हैं अमरूद की सब्ज़ी…

सामग्री…

  • आधा किलो अमरूद
  • हरी मिर्च
  • हरी धनिया
  • काली मिर्च
  • सेंधा नमक एक टी स्पून
  • जीरा एक टी स्पून
  • नीबूं .एक
  • चीनी… तीन टी स्पून

अमरूद को चाकू से छील लें | फिर उसके बीज चाकू से निकाल कर अलग कर दें | अब बारीक बारीक अमरूद को काट लें | पैन में बस एक चम्मच घी डालकर जीरे और हरी मिर्च का तडका लगाएँ | अब उसे चलाकर ढक दें | पाँच मिनट के बाद उसमें सेंधा नमक डाल कर फिर पकाएँ | जब पकने को हो उसमें चीनी डालकर एक नींबू निचोड़ कर चलाकर ढक दें | अब आपकी विटामिन सी से भरपूर एनर्जी देने वाली सब्जी बनकर तैयार है।

भाई मेहनत तो है, पर पौष्टिकता से भरपूर विटामिन सी युक्त भोजन है | तो आज ही तैयारी कर लीजिए | और हाँ, अमरूद पके हों तो सब्जी ज्यादा अच्छी बनती है |

साथ में कोई भी चटनी बना सकती हैं | व्रत की चटनी को सिलबट्टे से ही पीसे बस खाने भर का ही पीसे | एक साथ पीस कर सात दिन न चलाएँ | व्रत का भोजन कभी रखा हुआ नहीं खाते हैं | हमेशा खाने पूर्व ही बनाएँ |

________________रेखा अस्थाना

 

और अब… कुछ मीठा हो जाए…? तो सीखते हैं अर्चना गर्ग से अरबी का गोंद बनाने की विधि…

सामग्री…

  • 1kg अरबी थोड़ी मोटी और बड़ी
  • तलने के लिए ढाई सौ ग्राम देसी घी
  • 300 ग्राम चीनी
  • डेढ़ सौ ग्राम पानी

बनाने की विधि…

Sweet chips of Taro root
Sweet chips of Taro root

सबसे पहले हमने अरबी को अच्छे से छिलके उसे पानी से रगड़ रगड़ के धो लिया | फिर सूखे कपड़े से उसे अच्छी तरीके से पोंछ लिया | जब उसका लिसलिसापन खत्म हो गया तो चिप्स वाली मशीन में उसके चिप्स बना लिए और एक धोती के कपड़े पर उसे फैला दिए और पंखा चला दिया | 10 मिनट में वह हल्के हल्के से फरहरे ऐसे हो जाएंगे | फिर कढ़ाई में घी गरम करने के लिए रख दें | जब घी गरम हो जाए तो उसमें थोड़े-थोड़े चिप्स डालती जाएं | जब वह गोल्डन ब्राउन हो जाएं तो उन्हें निकाल निकाल कर रखती रहे | इस तरह से सारे चिप्स तल ले |

अब दूसरी कढ़ाई में पानी और चीनी चढ़ा दें | जब चीनी घुल जाए अच्छी तरीके से और दो तार की चाशनी बन जाए तब उसमें सारे चिप्स डाल दें और उनको चलाती रहे ताकि सबके ऊपर चाशनी चढ़ जाए और एक एक चिप्स खिल जाए | लीजिए अरबी का गोंद तैयार हो गया | यह खाने में बहुत ही स्वादिष्ट लगता है और मां का भोग भी लग गया | इसे अरबी के मीठे चिप्स भी कह सकते हैं…

अस्तु, अन्त में, समस्त देवताओं ने जिनकी उपासना की वे देवी कूष्माण्डा के रूप में सबके सारे कष्ट दूर कर हम सबका शुभ करें…

 

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Navaratri Special Falahari Recipes

नवरात्रि स्पेशल – फलाहारी रेसिपीज़

जैसा कि सब ही जानते हैं चैत्र नवरात्र चल रहे हैं और हर घर में माँ भगवती के नौ रूपों की पूजा अर्चना की जा रही है | आज चैत्र शुक्ल तृतीया – यानी तीसरा नवरात्र है – देवी के चन्द्रघंटा रूप की उपासना का दिन | चन्द्रः घंटायां यस्याः सा चन्द्रघंटा – आह्लादकारी चन्द्रमा जिनकी घंटा में स्थित हो वह देवी चन्द्रघंटा के नाम से जानी जाती है – इसी से स्पष्ट होता है कि देवी के इस रूप की उपासना करने वाले सदा सुखी रहते हैं और किसी प्रकार की बाधा उनके मार्ग में नहीं आ सकती |

नौ दिन चलने वाले इस पर्व में लगभग प्रत्येक घर में फलाहार ही ग्रहण किया जाएगा | हम पिछले कुछ दिनों से अपने WOW India के सदस्यों द्वारा भेजी हुई भारतीय परम्परा के अनुसार बनाए जाने वाले फलाहारी पकवानों की रेसिपीज़ आपके साथ साँझा कर रहे हैं | इसी क्रम में आज हम फिर से दो रेसिपीज़ प्रस्तुत कर रहे हैं… पहली रेसिपी है दही भल्लों की और दूसरी एक ख़ास क़िस्म के शरबत की… तो, पहले खाने का कार्य हो जाए… जी हाँ, भल्ले… जिन्हें बड़े भी कहा जाता है… हम लोग मूँग की दाल, उड़द की दाल वगैरा के भल्ले तो अक्सर खाते ही हैं… लेकिन व्रत में तो ये खाए नहीं जा सकते… तो क्यों न कुट्टू ले आटे में लौकी मिलाकर उसके भल्ले बनाए जाएँ…? कैसे…? आइये सीखते हैं रेखा अस्थाना जी से… और फिर उन्हें पचाने के लिए आँवले का शरबत… जो हमें सिखाएँगी अर्चना गर्ग… डॉ पूर्णिमा शर्मा…

लौकी के भल्लों के लिए सामग्री…

  • लौकी… आधा किलो

    Dahi Balla
    Dahi Balla
  • कुट्टू का आटा एक कटोरी (कुट्टू का आटा सदैव छानकर ही इस्तेमाल करें)
  • दही… आधा किलो
  • सेंधा नमक… स्वादानुसार
  • भुना जीरा… दो स्पून
  • कटी हरी मिर्च… स्वादानुसार
  • अदरख यदि खाते हो तो – हमने आपसे पहले भी बताया है कि आवश्यक नहीं आप ये सारी चीज़ें इस्तेमाल करें, वही चीज़ें इस्तेमाल करें जो आपके घर में खाई जाती हैं
  • रिफाइंड ऑयल… तलने के हिसाब से

विधि…

लौकी छीलकर कद्दूकस कर लें | फिर उसका पानी निचोड़ लें | निचोड़ी हुई लौकी को जीरा और हरी मिर्च के साथ एक चम्मच रिफाइंड कढ़ाई में डालकर उसे पका लें और फिर ठंडा करके उसमें कुट्टू का आटा, सेंधा नमक और अदरख मिलाकर पेड़े का आकार देकर नानस्टिक में गुलाबी सेंक कर प्लेट पर रख लें |

इधर दही को फेंटकर उसमें नमक, भुना पिसा जीरा व हरी मिर्च तथा हरी धनिया मिलाकर तैयार रखें | जब व्रत खोलने का समय हो उससे दस मिनट पूर्व प्लेट में सजी लौकी के पेड़ों पर दही डालकर सर्व करें |

इनको वाराणसी में उपवासी दही बड़े कहा जाता है | इसे खाने से तन -मन दोनों ही स्वस्थ रहता है | पेट भी ठीक रहता है | इसी तरह कच्चे पपीते के भी भल्ले बनाए जा सकते हैं |

इनके साथ यदि इमली या अनारदाने की सोंठ हो या हरी चटनी भी हो तो स्वाद और अधिक बढ़ जाएगा…

_________रेखा अस्थाना

 

आंवले का शरबत

अभी हमने बहुत सारी व्रत की रेसिपी सीखी | आज हम आपको बताने जा रहे हैं आंवले का शरबत जो कि व्रत में पिया जा सकता है | यह सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद है | आंवले का शरबत बनाना बहुत ही आसान है | चलिए देखते हैं कि आंवले का शरबत कैसे बनाते हैं…

सामग्री…

Amle ka Sharbat
Amle ka Sharbat
  • एक कप आंवले का रस
  • दो कप चीनी
  • कुछ पुदीने के पत्ते
  • थोड़ा सा काला नमक
  • थोड़ा सा भुना जीरा
  • एक कप पानी

बनाने की विधि…

सबसे पहले हमने आंवले का एक कप जूस निकाला | आंवले का जूस निकालने के लिए आंवलों को महीन कद्दूकस में कस कर महीन जाली के कपड़े से छान छान कर कसके निचोड़ लीजिये |

अब कढ़ाई में चीनी और पानी डालकर उसे उबालने रख दीजिये | जब वह अच्छी तरह से उबल जाए तो उसमें चीनी मिलाकर गैस बंद कर दे और उसे ठंडा होने के लिए रख दें | जब वह बिल्कुल ठंडा हो जाए तो उसे कांच की बोतल में भरकर फ्रिज में भरकर रख दें | यह लगभग 2 से 3 महीने तक फ्रिज में चल सकता है | जब आपके घर में कोई आए या आपको खुद पीना हो तो ग्लास में चार चम्मच आंवले का शरबत डाल दें और कुछ क्रश किया हुआ बर्फ और पानी मिला दे | आप चाहे तो इसको सोडे में भी सर्व कर सकते हैं | सर्व करते समय इसमें थोड़ा सा काला नमक थोड़ा सा भुना जीरा और चार पांच पत्ते पुदीने के डालकर आप इसे सर्व करें यह बहुत ही स्वादिष्ट शरबत होगा |

आंवले में भरपूर मात्रा में विटामिन सी, कैल्शियम और कैंसर के बचाव के लिए एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं | आंवले का जूस अल्सर की रोकथाम में बहुत गुणकारी है | वजन कम करने के लिए आंवला बहुत फायदेमंद है | आंख की रोशनी और बालों को काला करने के लिए यह एक रामबाण का काम करता है | साथ ही शरीर को ठंडक पहुँचाता है |

__________________अर्चना गर्ग

तो बनाइये लौकी के भल्ले और साथ में आनन्द लीजिये आंवले के शरबत का… माँ चन्द्रघंटा के रूप में भगवती सभी की रक्षा करें और सभी की समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण करें… डॉ पूर्णिमा शर्मा…

 

bookmark_borderNavaratri Special – Falahari Recipes

Navaratri Special – Falahari Recipes

नवरात्रि स्पेशल – फलाहारी रेसिपीज़

जैसा कि सब ही जानते हैं, आज से माँ भगवती के नौ रूपों की उपासना का पर्व नवरात्र आरम्भ हो चुके हैं | आज दूसरा नवरात्र है – देवी के ब्रह्मचारिणी रूप की उपासना आज की जाती है | नौ दिन चलने वाले इस पर्व में लगभग प्रत्येक घर में फलाहार ही ग्रहण किया जाएगा | हम पिछले तीन दिनों से अपने WOW India के सदस्यों द्वारा भेजी हुई भारतीय परम्परा के अनुसार बनाए जाने वाले फलाहारी पकवानों की रेसिपीज़ आपके साथ साँझा कर रहे हैं | इसी क्रम में आज हम प्रस्तुत कर रहे हैं दो रेसिपीज़… पहली रेसिपी है लड्डुओं की और दूसरी एक ख़ास तरह की रबड़ी की… और अन्त में चलते चलते कुछ अपनी पसन्द का भी लिखा है… डॉ पूर्णिमा शर्मा

पहली रेसिपी है सफ़ेद तिल, बादाम और पेठे से बने लड्डू जो हमें सिखा रही हैं रेखा अस्थाना…

तिल, बादाम और पेठे से बने लड्डू
तिल, बादाम और पेठे से बने लड्डू

सामग्री…

  • बादाम…150 ग्रा०
  • तिल… 200 ग्रा० सफेद
  • पेठा मीठा तैयार… 200 ग्रा०

विधि…

बादाम को आधे छोटे चम्मच घी डालकर सेंक ले |

फिर कढा़ई को पोंछकर उसमें तिल भून लें | तिल तड़कने लगें तो उतार लें और ठण्डा होने दें |

पेठा कद्दूकस कर लें |

अब तिल, बादाम और पेठा सब मिलाकर लड्डू बाँध लें |

तो सबसे पहले माँ भगवती को भोग लगाकर अपने घर के लड्डू गोपाल को खिलाएँ… बच्चों को बार बार खिलाकर ही टेस्ट डेवेलप होता है अन्यथा इन सब चीज़ों को कोई पसन्द नहीं करता… खासकर आजकल के बच्चे… लेकिन पौष्टिकता से भरपूर ये लड्डू होते हैं और व्रत में इन्हें खाने से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है… तो एक बार बनाकर ज़रूर देखें…

रेखा अस्थाना

 

और अब दूसरी रेसिपी… रबड़ी तो हम सभी बड़े चाव से खाते हैं… हम तो जिस नगर से आते हैं – नजीबाबाद से – क्या ग़ज़ब होती थी वहाँ की रबड़ी… अच्छी तरह से कढाए

आम की रबड़ी
आम की रबड़ी

हुए दूध की बनती थी वो रबड़ी और मुलायम लेकिन मोटे लच्छे भी होते थे हलके मीठे की उस रबड़ी में… अभी भी याद करते हैं तो मुँह में पानी भर आता है… लेकिन आज एक अलग ही तरह की रबड़ी हमें बनाना सिखा रही हैं अर्चना गर्ग… जी हाँ, के मौसम में आम की रबड़ी… आइये सीखते हैं…

आम की रबड़ी

सामग्री…

  • 1kg फुल क्रीम दूध
  • ½kg tight आम जिसका लच्छा बन सके
  • 1/4 चम्मच इलायची पाउडर
  • 1/2 कप कंडेंस्ड मिल्क या चीनी
  • 50 ग्राम बादाम और काजू सजाने के लिए

बनाने की विधि…

दूध को एक पैन में गर्म करने के लिए रख दें | जब वह उबलने लगे और 1/4 रह जाए तो गैस बन्द कर दें | अगर आप कंडेंस्ड मिल्क मिला रही हैं तो चीनी ना मिलाएं | साथ ही आम को कद्दूकस करके लच्छा बना लें | जब दूध बिल्कुल ठंडा हो जाए तो उसमें इलायची पाउडर और लच्छा मिला दें | लीजिए आम की रबड़ी तैयार है | इतनी सरल है बनाने में और खाने में बहुत स्वादिष्ट लगती है | नवरात्र के लिए स्पेशल मिठाई है | आम का सीजन भी आ गया है… तो आप भी खाएं औरों को भी खिलाएं…

_____________अर्चना गर्ग

 

कच्चे आलू का चीला

कच्चे आलू का चीला
कच्चे आलू का चीला

तो ये तो थीं दो बड़ी ही स्वादिष्ट मिठाइयाँ व्रत में खाने के लिए | अब क्यों न कुछ नमकीन भी हो जाए ? भई हमें कच्चे आलू के चीले बहुत पसन्द हैं | आपमें से बहुत से घरों में ये बनाए भी जाते होंगे | हर किसी की अपनी अपनी विधि होती है बनाने की… तो हम जिस तरह से बनाते हैं उसकी विधि आपको बता रहे हैं…

इसके लिए एक कच्चा आलू लीजिये | इसे छीलकर कद्दूकस में कस कर लच्छा बना लीजिये | लच्छा न अधिक मोटा हो न बारीक | मीडियम साइज़ में हो | आलू के लच्छे का सारा पानी निचोड़ लीजिये और इस लच्छे में अपने स्वाद के अनुसार नमक, बारीक कटी हुई हरी मिर्च, बारीक कटा हुआ अदरख और थोड़ा सा बारीक कटा धनिया मिला लीजिये | अब एक नॉन स्टिक पेन गर्म कीजिए | गर्म होने पर इस पर ब्रश की सहायता से हल्की सी चिकनाई चुपड़ दीजिये और आलू के लच्छे का जो घोल आपने बनाकर रखा है उसे इस पर चीले की तरह से फैला दीजिये | एक तरफ से सिक जाए तो पलट कर दूसरी ओर से ब्राउन होने तक सेक लीजिये | पलटना आराम से है ताकि टूट न जाए | लीजिये आपका गरमागरम करारा करारा आलू का चटपटा चीला तैयार है | इसे आँवले की चटनी के साथ सर्व कीजिए और ख़ुद भी खाइए | आँवले की चटनी की रेसिपी कल रखा जी ने बताई थी…

_________डॉ पूर्णिमा शर्मा

bookmark_borderNavaratri Special – Sago or Tapioca Cutlets

Navaratri Special – Sago or Tapioca Cutlets

नवरात्रि स्पेशल – साबूदाना कटलेट

जैसा की सब ही जानते हैं, आज से माँ भगवती के नौ रूपों की उपासना का पर्व नवरात्र आरम्भ हो चुके हैं | नौ दिन चलने वाले इस पर्व में लगभग प्रत्येक घर में फलाहार ही ग्रहण किया जाएगा | हम पिछले तीन दिनों से अपने WOW India के सदस्यों द्वारा भेजी हुई फलाहार की रेसिपीज़ आपके साथ साँझा कर रहे हैं | इसी क्रम में क्यों न आज बनाए जाएँ साबूदाने के कटलेट…? वैसे तो साबूदाने कटलेट प्रायः हर घर में बनाए जाते हैं… लेकिन हर किसी के बनाने की विधि और स्वाद अलग होता है… तो आज सीखते हैं हमारी रेखा अस्थाना जी से साबूदाने के कटलेट बनाना… डॉ पूर्णिमा शर्मा…

साबूदाने के कटलेट के लिए सामग्री…

  • एक कटोरी साबूदाना एक दिन पहले से भीगे हुए, सुबह पानी निथार दे

    Rekha Asthana
    Rekha Asthana
  • चार उबले आलू
  • हरी मिर्च चार
  • हरी धनिया
  • कद्दूकस किया हुआ अदरख एक चम्मच
  • सेंधा नमक

विधि…

साबूदाना खूब अच्छी तरह से भीगकर फूल जाना चाहिए | उसका सारा पानी निथार लें | अब उसमें हरी मिर्च, हरी धनिया, अदरख व सेंधा नमक मिला लें | आलू को मैश कर उसी में मिला लें |

हथेली में रिफाइन्ड लगाकर छोटी लोई बराबर मिक्सड साबूदाना ले कर हार्ट की आकृति बना कर प्लेट में रखती जाएँ | जब सब बन जाए तो उसे आप चाहें तो तलें या  नानस्टिक में गुलाबी सेंक लें |

चटनी के साथ गरमागरम परोसे |

व्रत की चटनी के लिए सामग्री…

  • धनिया या पुदीना जो भी व्रत में आपके यहाँ खाया जाता हो
  • हरी मिर्च
  • कच्चा आँवला
  • सेंधा नमक

इन सबको मिलाकर थोड़ी गीली सी चटनी बना लें | इन कटलेट के साथ बाउल में अवश्य दें |

ध्यान रहे कि सब घरों में व्रत में जो भी तेल नमक घी आदि प्रयोग किये जाते हैं वे एक ही नहीं होते | किसी घर में सेंधा नमक काम में लेटे हैं तो कहीं साधारण नामक ही लेटे हैं | कहीं देसी घी इस्तेमाल करते हैं ओ कहीं कोई तेल | इसलिए आपके यहाँ जो खाया जाता है केवल उसी का ही इस्तेमाल करें |

वैसे अभी हम आपको नौ दिन बिल्कुल अलग तरह का फलाहार खिलाने वाले हैं। बस आप एक बार बनाकर देखें।

___________रेखा अस्थाना

bookmark_borderNavaratri Special – Water Chestnut Flour Kadhi

Navaratri Special – Water Chestnut Flour Kadhi

नवरात्रि स्पेशल – सिंघाड़े के आटे की कढ़ी

जैसा की सब ही जानते हैं, कल से माँ भगवती के नौ रूपों की उपासना का पर्व नवरात्र आरम्भ होने जा रहे हैं | सभी लोग पूर्ण आस्था के साथ माँ भगवती की पूजा अर्चना

Rekha Asthana
Rekha Asthana

करेंगे | चौदह अप्रैल को चैत्र शुक्ल द्वितीया – दूसरा नवरात्र – माँ भगवती के दूसरे रूप की उपासना का दिन | देवी का दूसरा रूप ब्रह्मचारिणी का है – ब्रह्म चारयितुं शीलं यस्याः सा ब्रह्मचारिणी – अर्थात् ब्रह्मस्वरूप की प्राप्ति करना जिसका स्वभाव हो वह ब्रह्मचारिणी | यह देवी समस्त प्राणियों में विद्या के रूप में स्थित है…

नवरात्घरों में घर घर में व्रत में खाए जाने वाले फलाहार के पकवान बनेंगे | प्रायः हर घर में साबूदाने की खिचड़ी, कुट्टू सिंघाड़े के आटे की पूरी पकौड़ी, सिंघाड़े के आटे का हलवा, रागी और चौलाई के आटे से बने पकवान, सामख के चावलों से निर्मित पकवान, मखाने की खीर इत्यादि इत्यादि न जाने कितने प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं | हम इस अवसर पर अपने सदस्यों द्वारा भेजी हुई नवरात्रों में खाए जाने वाले पकवानों की विधि आपको बता रहे हैं | कढ़ी तो हम सभी बे चाव से खाते हैं… अलग अलग तरह की कढ़ी… कहीं पंजाबी कढ़ी तो कहीं मारवाड़ी कढ़ी तो कहीं गुजराती कढ़ी, सिन्धी कढ़ी, हिमाचली कढ़ी इत्यादि इत्यादि… कहीं कढ़ी बेसन और दही मट्ठे से बनाई जाती है, कहीं इमली से तो कहीं मूँग की डाल की पिट्ठी की कढ़ी बनाई जाती है… लेकिन इनमें से कोई भी कढ़ी नवरात्रों में नहीं खाई जा सकती… अब अगर नवरात्रों में परिवार के सदस्यों का कढ़ी खाने का मन क्या करेंगे…? ज़ाहिर सी बात है नवरात्र में जिस जिस आटे का हम प्रयोग करते हैं उसी आटे से बनाएँगे… तो आइये आज बनाते हैं सिंघाड़े के आटे की कढ़ी… कैसे…? आइये सीखते हैं हमारी रेखा अस्थाना जी से… एक और बात, रेखा जी वाराणसी से सम्बन्ध रखती हैं इसलिए वे प्रायः उसी क्षेत्र की रेसिपीज़ साँझा करती हैं… रेसिपी पढ़ने के लिए कृपया लिंक पर जाएँ… डॉ पूर्णिमा शर्मा…

शकरकन्दी का पूओं की तरह ये भी ये भी वाराणसी का ही व्यंजन है | वाराणसी के लोग मस्त मौला और शिव जी के उपासक हैं | वहाँ हलवाई भी खूब फलाहार बनाते हैं | प्रातः ही नहा धोकर लग जाते हैं फलाहार बनाने में | क्या मज़ाल कि आप उनके व्यंजन को छू भी दें | अगर गलती से छू दिया आपने तो सब  कुछ गौ माता को खिला कर सबका पैसा आपसे वसूलेंगे | तो भैया सावधान होकर ही जाना आप…

अब हम आपको कढ़ी की विधि बताएँगे…

सामग्री…

  • एक कटोरी सिंघाड़े का आटा

    Singhada kadhi
    Singhada kadhi
  • एक कटोरी दही
  • चार हरी मिर्च
  • चार उबले आलू
  • एक चम्मच जीरा
  • नमक सेंधा स्वादानुसार

विधि…

आलू को स्लाइस में काट कर हरी मिर्च और जीरे के साथ छौंक दें |

अब सिंघाड़े का आटा व दही खूब अच्छी तरह मिलाकर घोल बना लें | घोल पतला ही होना चाहिए | दस मिनट के बाद उस घोल को आलू की कड़ाही में डाल दें और करछुल से चलाते रहें | ध्यान रहे बराबर चलाते रहना है जब तक वह पन्द्रह मिनट में पक न जाए |

आप अपने हिसाब से उसमें हरी धनिया भी डाल सकती हैं |

ध्यान रहे आपके घर पर व्रत में जो खाया जाता है उसी का इस्तेमाल करें | ये कुट्टू के आटे की गर्म पूड़ियों के साथ बहुत अच्छी लगेगी |

इसके साथ ही हरी धनिया, हरी मिर्च और एक आँवला डालकर आप चटनी पीस सकती हैं | सभी चीज़ों में सेंधा नमक का ही इस्तेमाल करें | यह हितकर होता है |

माँ भगवती का ब्रह्मचारिणी रूप हम सबकी रक्षा करते हुए सबकी मनोकामनाएँ पूर्ण करे और सबके ज्ञान विज्ञान में वृद्धि करे…

___________________रेखा अस्थाना