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bookmark_borderThere is victory beyond fear

There is victory beyond fear

डर के आगे जीत है

Katyayani Dr. Purnima Sharma
Katyayani Dr. Purnima Sharma

आज हर कोई डर के साए में जी रहा है | कोरोना ने हर किसी के जीवन में उथल पुथल मचाई हुई है | आज किसी को फोन करते हुए, किसी का मैसेज चैक करते हुए हर कोई डरता है कि न जाने क्या समाचार मिलेगा | जिससे भी बात करें हर दिन यही कहता मिलेगा कि आज उसके अमुक रिश्तेदार का स्वर्गवास हो गया कोरोना के कारण, आज उसका अमुक मित्र अथवा परिचित कोरोना की भेंट चढ़ गया | पूरे के पूरे परिवार कोरोना की चपेट में आए हुए हैं | हर ओर त्राहि त्राहि मची हुई है | साथ ही, जब समाचार मिलते हैं कि ऑक्सीजन की कमी है या लूट हो रही है, दवाओं की जमाखोरी के विषय में समाचार प्राप्त होते हैं तो इस सबको जानकार भयग्रस्त होना स्वाभाविक ही है | लेकिन हम एक कहावत भूल जाते हैं “जो डर गया वो मर गया” और “डर के आगे जीत है”… जी हाँ, डरने से काम नहीं चला करता | किसी भी बात से यदि हम भयभीत हो जाते हैं तो इसका अर्थ है कि हमारी संकल्प शक्ति दृढ़ नहीं है… और इसीलिए हम उस बीमारी को या जिस भी किसी बात से डर रहे हैं उसे अनजाने ही निमन्त्रण दे बैठते हैं… और समय से पूर्व ही हार जाते हैं… हम यह नहीं कहते कि कोरोना से डरा न जाए… बिल्कुल डरना चाहिए… लेकिन इसलिए नहीं कि हमें हो गया तो क्या हो गया… बल्कि इसलिए कि अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए हम कोरोना के लिए बताए गए दिशा निर्देशों का कड़ाई से पालन करें…

डर तो किसी भी बात का हो सकता है | किसी को अपनी असफलता का भय हो सकता है, कोई भविष्य के विषय में चिन्तित हो सकता है, कोई रिजेक्ट किये जाने के भय से चिन्तित हो सकता है, किसी को अपना कुछ प्रिय खो जाने का भय हो सकता है, किसी को दुर्घटना का भय हो सकता है तो किसी को मृत्यु का भय और भी न जाने कितने प्रकार के भयों से त्रस्त हो सकता है | इसका परिणाम क्या होता है… कि हम अपना वर्तमान का सुख भी नहीं भोग पाते | जो व्यक्ति डर डर कर जीवन यापन करता है वह कभी प्रसन्न रह ही नहीं सकता |

हम अपने भयों से – परिस्थितियों से – पलायन कर जाना चाहते हैं | उनका सामना करने का साहस हम नहीं जुटा पाते | लेकिन हर समय डर डर कर जीना या परिस्थितियों से पलायन करना तो समस्या का समाधान नहीं | इससे तो परिस्थितियाँ और भी बिगड़ सकती हैं | क्योंकि नकारात्मकता नकारात्मकता को ही आकर्षित करती है – Negativity attracts negativity” इसलिए सकारात्मक सोचेंगे तो हमारे चारों ओर सकारात्मकता का एक सुरक्षा चक्र निर्मित हो जाएगा और हम बहुत सीमा तक बहुत सी दुर्घटनाओं से बच सकते हैं | प्रयोगों के द्वारा ये बात सिद्ध भी हो चुकी है अनेकों बार |

तो डर को दूर भगाने के लिए सबसे पहले हमें उसका सामना करने की सामर्थ्य स्वयं में लानी होगी | इसके लिए सबसे पहले हमें यह स्वीकार करना होगा कि हाँ हम भयग्रस्त हैं | और फिर जिस बात से भी हम डरे हुए हैं वह बात हमें कितना बड़ा आघात पहुँचा सकती है इस विषय में सोचना होगा कि यदि हम डरकर बैठ रहे तो हमारी हार होगी और उसका कितना बड़ा मूल्य हमें चुकाना पड़ सकता है | कितना कष्ट हमें उस परिस्थिति से हो सकता है जिसके विषय में सोच कर भी हमें डर लगता है इस विषय में भी सोचना होगा | और तब अपने भीतर से ही हममें साहस आएगा कि या तो हम उस परिस्थिति को आने ही न दें, और यदि आ भी जाए तो साहस के साथ उसका सामना करके उसे हरा सकें |

आज जिस प्रकार से ऑक्सीजन के लिए, दवाओं के लिए मारामारी मची हुई है वह सब भय के ही कारण है और उसका लाभ जमाखोरों और कालाबाज़ारी करने वालों को मिल रहा है | जिन लोगों को अभी कोरोना के लक्षण नहीं भी हैं या कम लक्षण हैं वे भी घबराकर दवाओं और ऑक्सीजन के लिए भागे भागे फिर रहे हैं | अस्पतालों में बेड के लिए भागे फिर रहे हैं | इन लोगों के डर के ही परिणामस्वरूप जमाखोरों और कालाबाज़ारी करने वालों की चाँदी हो रही है | जबकि डॉक्टर्स बार बार कह रहे हैं कि यदि हल्के से लक्षण हैं तो अस्पताल की तरफ मत देखिये – घर में रहकर ही डॉक्टर की बताई दवा समय पर लीजिये, प्राणायाम कीजिए, मास्क और साफ़ सफाई का ध्यान रखिये और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कीजिए – ऐसा करके आप घर में रहकर ही रोगमुक्त हो जाएँगे, और जमाखोरों तथा कालाबाज़ारी करने वालों को भी अवसर नहीं मिलेगा कि वे ऑक्सीजन और दवाओं को इकट्ठा करके मनमाने दामों में बेचकर जनता को लूट सकें | बीमारी की आग पर अपनी रोटियाँ सेंकने वाले राजनेताओं की बन आती है |

जिन लोगों ने इस आपदा के कारण अपने प्रियजनों को खोया है उनका कष्ट समझ में आता है | या जिन लोगों ने कोरोना को झेला है उनकी चिन्ता भी समझ में आती है | लेकिन यदि थोड़ी समझदारी और शान्ति से काम लिया जाए तो और अधिक नुकसान होने से बचाया जा सकता है | अभी दो दिन पहले सभी ने एक समाचार अवश्य देखा पढ़ा होगा कि किसी बुज़ुर्ग व्यक्ति ने एक युवक के लिए अस्पताल का अपना वो बेड छोड़ दिया जो उन्हें उनके परिवार वालों ने बड़ी भाग दौड़ के बाद दिलाया था | उनका कहना था कि “मैं तो अपना जीवन जी चुका, अब इन्हें इनका जीवन जीने देना है…” और घर वापस जाने के दो दिन बाद स्वर्ग सिधार गए | ये तो एक समाचार है, बहुत से ऐसे उदाहरण मानवता के आजकल सुर्ख़ियों में हैं |

रामायण में प्रसंग आता है कि अंगिरा और भृगुवंश के ऋषियों के कोप के कारण हनुमान जी अपनी शक्ति भुला बैठे थे | भगवान श्री राम ने जब उन्हें लंका जाने के लिए कहा तो उन्होंने असमर्थता प्रकट की | तब जामवन्त ने उनके गुणों का बखान उनके समक्ष किया और इस प्रकार उन्हें उनकी शक्ति का आभास कराया और वे “राम काज” करने में समर्थ हो सके | इसलिए व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य कभी नहीं भूलनी चाहिए और समय पर उसका सदुपयोग करना चाहिए | और आज ये महामारी हमारे लिए जामवन्त बनकर आई है जो हमें सीख दे रही है कि हमें अपनी सामर्थ्य को नहीं भूलना चाहिए | और इस महामारी के समय सबसे बड़ी शक्ति यही है कि हम सभी सुरक्षा नियमों का पालन करें और यदि हलके लक्षण कोरोना के हैं भी तो घर में रहकर ही डॉक्टर की बताई दवा समय पर लें, अकारण ही घर से बाहर न जाएँ, मास्क लगाएँ, उचित दूरी बनाकर रखें, साफ सफाई का ध्यान रखें, एक दूसरे की सहायता के लिए आगे आएँ, वैक्सीन लें, बीमारी के सम्बन्ध में नकारात्मक तथा डराने वाले समाचारों को देखने सुनने से बचें… और सबसे बड़ी शक्ति ये कि घबराएँ नहीं और संकल्प शक्ति दृढ़ बनाए रहें ताकि कोरोना से लड़ाई में जीत सकें… माना अभी समय कुछ अच्छा नहीं है – लेकिन ये समय भी शीघ्र ही निकल जाएगा – इस प्रकार की सकारात्मकता का भाव बनाए रखें… क्योंकि सकारात्मकता किसी भी विपत्ति को दूर करने में सहायक होती है…

सुख जाता है दुःख को देकर, दुःख जाता है सुख को देकर |

सुख देकर जाने वाले से डरना क्या इस जीवन में ||

__________________कात्यायनी

bookmark_borderCorona and Mahaveer Jayanti

Corona and Mahaveer Jayanti

कोरोना और महावीर जयन्ती

Katyayani Dr. Purnima Sharma
Katyayani Dr. Purnima Sharma

जय श्री वर्द्ध्मानाय स्वामिने विश्ववेदिने

नित्यानन्द स्वभावाय भक्तसारूप्यदायिने |

धर्मोSधर्मो ततो हेतु सूचितौ सुखदुःखयो:

पितु: कारण सत्त्वेन पुत्रवानानुमीयते ||

आज चैत्र शुक्ल त्रयोदशी है – भगवान् महावीर स्वामी की जयन्ती का पावन पर्व | तो सबसे पहले तो सभी को महावीर जयन्ती की हार्दिक शुभकामनाएँ… हमें याद है हमारे पितृ नगर नजीबाबाद में – जहाँ जैन लोग बहुत अधिक तादाद में हैं… महावीर जयन्ती के अवसर पर जैन मन्दिर में बहुत बड़ा आयोजन प्रातः से सायंकाल तक चलता था… जैन अध्येता होने के कारण हमें भी वहाँ बुलाया जाता था… और सच में बहुत आनन्द आता था… दिल्ली में भी कई बार महावीर जयन्ती के कार्यक्रमों में भाग लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ…

सभी जानते हैं कि महावीर स्वामी जैन धर्म के चौबीसवें और अन्तिम तीर्थंकर थे | अब तीर्थंकर किसे कहते हैं ? तीर्थं करोति स तीर्थंकर: – अर्थात जो अपनी साधना के माध्यम से स्वयं संसार सागर से पार लगाने वाले तीर्थों का निर्माण करें वह तीर्थंकर | तीर्थंकर का कर्तव्य होता है कि वे अन्यों को भी आत्मज्ञान के मार्ग पर अग्रसर करने का प्रयास करें | इसी क्रम में प्रथम तीर्थंकर हुए आचार्य ऋषभदेव और अन्तिम अर्थात चौबीसवें तीर्थंकर हुए भगवान् महावीर – जिनका समय ईसा से 599-527 वर्ष पूर्व माना जाता है | णवकार मन्त्र में सभी तीर्थंकरों को नमन किया गया है “ॐ णमो अरियन्ताणं” | समस्त जैन आगम अरिहन्तों द्वारा ही भाषित हुए हैं |

जैन दर्शन मानता है कि प्रत्येक वस्तु अनन्तधर्मात्मक है और संसार की समस्त वस्तुएँ सदसदात्मक हैं | जैन दर्शन हमारे विचार से पूर्ण रूप से सम सामयिक दृष्टि है… सम्यग्दर्शन, सम्यग्चरित्र तथा सम्यग्चिन्तन की भावना पर सबसे अधिक बल जैन दर्शन में ही दिया गया है… और आज जिस प्रकार से सामाजिक परिदृश्य में, राजनीतिक परिदृश्य में, यहाँ तक कि पारिवारिक परिदृश्य में भी जिस प्रकार से एक असहमति, कुण्ठा आदि का विकृत रूप देखने को मिलता है उससे यदि मुक्ति प्राप्त हो सकती है तो वहाँ केवल ये सम्यग्दर्शन, सम्यक्चरित्र और सम्यक्चिन्तन की भावनाएँ ही काम आएँगी… समस्त संसार यदि सम्यग्दर्शन, सम्यग्चरित्र तथा सम्यग्चिन्तन की भावना को अंगीकार कर ले तो बहुत सी समस्याओं से मुक्ति प्राप्त हो सकती है – क्योंकि इस स्थिति में समता का भाव विकसित होगा और फिर किसी भी प्रकार की ऊँच नीच अथवा किसी भी प्रकार के ईर्ष्या द्वेष क्रोध घृणा इत्यादि के लिए कोई स्थान ही नहीं रह जाएगा…

ये तो हुआ दार्शनिक पक्ष | व्यावहारिक और सामाजिक पक्ष की यदि बात करें तो अपरिग्रह, अहिंसा, संयम और सेवा आदि जितने भी व्यवहारों पर भगवान महावीर स्वामी ने बल दिया है वे सभी न केवल वर्तमान कोरोना काल में, अपितु सदा के लिए मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हैं | जैसे…

अहिंसा – अर्थात किसी प्रकार की मनसा वाचा कर्मणा हिंसा का त्याग करें | परस्पर मैत्री भाव रखते हुए कोरोना के सम्बन्ध में जो दिशा निर्देश दिए गए हैं उनका पालन करेंगे तो इस आपदा के समय अपना स्वयं का बचाव करते हुए एक दूसरे के सहायक सिद्ध हो सकते हैं | लॉकडाउन में आवश्यक होने पर यदि किसी कार्य से घर से बाहर निकलना भी पड़ जाता है तो शान्ति बनाए रहे, यहाँ वहाँ हमारी सुरक्षा के लिए तत्पर पुलिस के समक्ष भी विनम्र रहें, उनसे झगड़ने की अपेक्षा उनके बताए दिशा निर्देशों का पालन करें ताकि स्थिति उग्र न हो और किसी प्रकार की अहिंसा की स्थिति उत्पन्न न होने पाए |

अपरिग्रह – अभी तो हमारे लिए कोरोना परिग्रह बना हुआ है – सारे संसार को इसने बन्धक बनाया हुआ है | तो क्यों न कुछ समय के लिए अपनी सभी इच्छाओं का त्याग करके केवल सीमित मूलभूत आवश्यकताओं की ही पूर्ति पर ध्यान दिया जाए – वो भी मिल बाँटकर ? आजकल इस प्रकार के समाचार भी प्राप्त हो रहे हैं कि कुछ व्यक्तियों ने दवाओं आदि को अपने घरों में स्टोर करना आरम्भ कर दिया है कि न जाने कब आवश्यकता पड़ जाए | अनावश्यक रूप से किसी वस्तु को अपने पास रखना ही परिग्रह कहलाता है | क्योंकि प्रस्तरकालीन मानव की ही भाँति आज कुछ व्यक्तियों की सोच यही बन चुकी है कि पहले स्वयं को बचाएँ, दूसरों के साथ चाहे जो हो | इस भावना से मुक्ति प्राप्त करने के लिए अपरिग्रह का आचरण अपनाने की आवश्यकता है |

सेवा – यदि हम सम्यग्दर्शन, सम्यग्चरित्र तथा सम्यग्चिन्तन के सिद्धान्त का पालन करेंगे तो सबको एक समान मानते हुए असहाय तथा अशक्त व्यक्तियों की सहायता के लिए भी आगे आ सकेंगे – और वह भी किसी पुरूस्कार अथवा नाम के लिए नहीं – न ही इसलिए कि सेवा करते हुए समाचार पत्रों में हमारे चित्र प्रकाशित हो जाएँगे | क्योंकि वास्तविक सेवा वह होती है कि जिसका किसी को पता भी न चल सके – जैसे कहा जाता है कि दान इस प्रकार होना चाहिए कि एक हाथ दान करे तो दूसरे हाथ को उसका भान भी न होने पाए | आज सेवाकार्य करते हुए चित्र खिंचवाना तथा उन्हें सोशल नेटवर्किंग पर पोस्ट करने की जैसे एक होड़ सी लगी हुई है | वास्तव में सेवाकार्य करना चाहते हैं तो इस भावना से ऊपर उठने की आवश्यकता है |

संयम – महावीर स्वामी का एक सिद्धान्त संयम का आचरण भी है | संकट की घड़ी है, जन साधारण के धैर्य की परीक्षा का समय है यह | कोरोना को हराना है तो धैर्य के साथ घरों में रहने की आवश्यकता है | अनावश्यक रूप से घरों से बाहर निकलेंगे तो अपने साथ साथ दूसरों के लिए भी समस्या बन सकते हैं | कोरोना के लक्षण दिखाई दें तो भी धैर्य के साथ – संयम के साथ विचार चिकित्सक से सम्पर्क साधें ताकि समय पर उचित चिकित्सा उपलब्ध हो सके |

और सबसे अन्त में लेकिन सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण मुखवस्त्रिका अर्थात मास्क | भगवान महावीर के अन्तिम सूत्र में मुखवस्त्रिका का वर्णन है | मुख में वायु के माध्यम से किसी भी प्रकार के जीव का प्रवेश होकर उसकी हिंसा न हो जाए इस भावना से मुखवस्त्रिका को आवश्यक बताया गया था – जो कि कोरोना की रोकथाम में सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है | साथ ही बार बार हाथ मुँह धोना और बाहर से आई प्रत्येक वस्तु को भी सेनिटायिज़ करके अर्थात साफ़ करके उपयोग में लाना – इसका भी यही उद्देश्य था कि किसी प्रकार के कीटाणु उस वस्तु में न रह जाएँ |

वे सभी सम्यग्दर्शन, सम्यग्चरित्र तथा सम्यग्चिन्तन के अन्तर्गत ही आते हैं | महावीर जयन्ती के इस अवसर पर यदि हम इनका पालन करने का संकल्प ले लें तो कोरोना जैसी महामारी से मुक्त होने में सहायता प्राप्त हो सकती है |

तो इस प्रकार की उदात्त भावनाओं का प्रसार करने वाले भगवान महावीर को नमन करते हुए प्रस्तुत हैं कुछ पंक्तियाँ…

हे महावीर शत नमन तुम्हें, शत वार तुम्हें है नमस्कार  

तुम्हारी कर्म श्रृंखला देव हमारी संस्कृति का श्रृंगार |

हे महावीर श्रद्धा से नत शत वार तुम्हें है नमस्कार

जो पथ दिखलाया तुमने वह है सकल मनुजता का आधार ||

तुमने दे दी हर प्राणी को जीवन जीने की अभिलाषा

ममता के स्वर में समझा दी मानव के मन की परिभाषा |

बन गीत और संगीत जगत को हर्ष दिया तुमने अपार

हे महावीर श्रद्धा से नत शत वार तुम्हें है नमस्कार ||

तुमको पाकर रानी त्रिशला के संग धरती माँ धन्य हुई

Mahaveer Jayanti
Mahaveer Jayanti

विन्ध्याचल पर्वत से कण कण में करुणाभा फिर व्याप्त हुई |

तुमसे साँसों को राह मिली, जग में अगाध भर दिया प्यार

हे महावीर श्रद्धा से नत शत वार तुम्हें है नमस्कार ||

तुम श्रम के साधक, कर्म विजेता, आत्मतत्व के ज्ञानी तुम

सम्यक दर्शन, सम्यक चरित्र और अनेकान्त के साधक तुम |

सुख दुःख में डग ना डिगें कभी, समता का तुमने दिया सार

हे महावीर श्रद्धा से नत शत वार तुम्हें है नमस्कार ||

हे महावीर शत नमन तुम्हें, शत वार तुम्हें है नमस्कार 

तुम्हारी कर्म श्रृंखला देव हमारी संस्कृति का श्रृंगार |

हे महावीर श्रद्धा से नत शत वार तुम्हें है नमस्कार

जो पथ दिखलाया तुमने वह है सकल मनुजता का आधार ||

अस्तु, भगवान महावीर स्वामी के सिद्धान्तों का पालन करते हुए सुरक्षा निर्देशों का पालन करते हुए सभी स्वस्थ रहें… सुरक्षित रहें… इसी कामना के साथ सभी को महावीर जयन्ती की हार्दिक शुभकामनाएँ…

______________कात्यायनी…

bookmark_borderVIBRATE HIGHER

VIBRATE HIGHER

The Spiritually inclined will understand:

The covid virus has a vibration of 5.5hz and dies above 25.5hz.

Dr. Sharda Jain
Dr. Sharda Jain

For humans with a higher vibration, infection is a minor irritant that is soon eliminated!

The reasons for having low vibration could be:

Fear, Phobia, Suspicion

Anxiety, Stress, Tension.

Jealousy, Anger, Rage

Hate, Greed

Attachment or Pain

And so……we have to understand to vibrate higher, so that the lower frequency does not weaken our immune system.

The frequency of the earth today is 27.4hz. but there are places that vibrate very low like:

Hospitals

Assistance Centers.

Jails

Underground etc.

It is where the vibration drops to 20hz, or less.

For humans with low vibration, the virus becomes dangerous.

Pain 0.1 to 2hz.

Fear 0.2 to 2.2hz.

Irritation 0.9 to 6.8hz.

Noise 0.6 to 2.2hz.

Pride 0.8 hz.

Superiority 1.9 hz.

A higher vibration on the other hand is the outcome of the following behaviour :-

Generosity 95hz

Gratitude 150 hz

Compassion 150 hz or more.

The frequency of Love and compassion for all living beings is 150 Hz and more.

Unconditional and universal love from 205hz

So…Come on …

Vibrate Higher!!!

VIBRATE HIGHER
VIBRATE HIGHER

What helps us vibrate high?

Loving, Smiling, Blessing, Thanking, Playing, Painting, Singing, Dancing, Yoga, Tai Chi, Meditating,  Walking in the Sun, Exercising, Enjoying nature, etc.

 Foods that the Earth gives us: seeds-grains-cereals-legumes-fruits and vegetables-

Drinking water: help us vibrate higher ….. !!!

The vibration of prayer alone goes from 120 to 350hz

So sing, laugh, love, meditate, play, give thanks and live !

Let’s vibrate high …!!!

This information is  compiled & edited by Naturotherapist Dr.  Harshal Sancheti, Nasik but

the original source of this information is anormous literature on sprituality

Please share this valuable information!

?

An article by the Chairperson of WOW India Dr. Sharda Jain

bookmark_borderReport of International Women’s Day Celebrations

Report of International Women’s Day Celebrations

International Women’s Day
International Women’s Day

Report of International Women’s Day Celebrations By WOW India & DGF

WOW India और DGF द्वारा आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस समारोह पर एक रिपोर्ट  

कल आठ मार्च को डिज़िटल प्लेटफ़ॉर्म Zoom पर WOW India और DGF के द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रंगारंग कार्यक्रम के बीच Award Ceremony का आयोजन किया गया | कार्यक्रम का आरम्भ दन्त चिकित्सक डॉ दीप्ति भल्ला के गाए थीम के साथ हुआ | डॉ भल्ला ने प्रसिद्ध गायिका सोना महापात्र के गाए प्रसिद्ध गीत “दीवारें ऊँची हैं गलियाँ हैं कम” को बहुत ही ख़ूबसूरत अन्दाज़ में प्रस्तुत किया, जिसे स्वाति चक्रवर्ती ने लिखा था और आमिर खान के प्रसिद्ध प्रोजेक्ट “सत्यमेव जयते” के लिए राम संपथ ने कम्पोज़ किया था | इस गीत के बजते ही जैसे समा बन्ध गया |

Dr. Sharda Jain
Dr. Sharda Jain

कार्यक्रम के आरम्भ में WOW India की Chairperson डॉ शारदा जैन ने महिलाओं का आह्वाहन किया कि वे नियमित रूप से अपने स्वास्थ्य की जाँच कराती रहें ताकि एक स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सकें | साथ ही ये भी कि हमें अपने महिला होने पर और अपनी उपलब्धियों पर गर्व करना चाहिए – और इस वर्ष की थीम का उद्देश्य भी यही है | एक और बड़ी सारगर्भित बात उन्होंने कही कि व्यक्ति जीवन भर विद्यार्थी तो बना ही रहता है, लेकिन हमें शिक्षक बनना आना चाहिए – हम जो भी सीखें उसे हमें दूसरों की सिखाना चाहिए – तभी हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकेंगे कि एक समर्थ महिला अपने साथ साथ अन्य महिलाओं को भी समर्थ बनाने की दिशा में प्रयास करे |

इस वर्ष की महिला दिवस की थीम थी Choose to Challenge, जिसके विषय में बोलते हुए संस्था की Secretary

Dr. Purnima Sharma
Dr. Purnima Sharma

General डॉ पूर्णिमा शर्मा ने कहा कि इस थीम का उद्देश्य यही है कि हम गली सड़ी उन रूढ़ियों को चुनौती दे सकते हैं जो नारी को दबाने के पक्ष में हों, बहुत से पूर्वाग्रहों को चुनौती दे सकती हैं जो हमें आगे बढ़ने से रोकते हों, जो भी नारी के विषय में यदि ग़लत धारणाएँ हैं उन्हें चुनौती के लिए चुन सकती हैं, साथ ही समाज में महिलाओं की स्थिति को सुधारने और उनकी उपलब्धियों का जश्न मनाने की चुनौती को चुन सकती हैं, इसी तरह की बहुत सी चुनौतियों के लिए आगे आया जा सकता है | साथ ही उनका कहना था कि इस थीम का एक ये आशय भी है कि अपने विचारों और अपने कर्तव्यों के लिए हम स्वयं ज़िम्मेदार हैं – हमें ज़िम्मेदारी लेनी ही होगी यदि हम एक जागरूक नागरिक कहलाना चाहते हैं और साथ ही समाज को अपनी सुसंस्कृत सन्तानों के रूप में आदर्श नागरिक देना चाहती हैं तो | एक महिला होने के नाते हमारी ये ज़िम्मेदारी भी बनती है कि हम समाज से असमानता और लिंग भेद के कारण जो महिलाओं पर अत्याचार होते हैं या महिलाओं को कम करके आँका जाता है उसे समाप्त करने की दिशा में क़दम उठाएँ

संस्था की उपाध्यक्ष बानू बंसल और सदस्य सरिता रस्तोगी ने दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया और साथ ही पूजा श्रीवास्तव जी ने अपनी सुमधुर वाणी में स्वरचित माँ वाणी की वन्दना प्रस्तुत की |

संस्था की अध्यक्ष डॉ एस लक्ष्मी देवी ने संस्था के विषय में बताते हुए संस्था की गतिविधियों और उद्देश्यों पर बात की साथ ही श्रीमद्भगवद्गीता के एक श्लोक का उद्धरण

Dr. S Lakshmi Devi
Dr. S Lakshmi Devi

प्रस्तुत करते हुए संस्था के सदस्यों की प्रशंसा करते हुए उनका उत्साहवर्धन भी किया की कोरोना के आतंक और लॉकडाउन के चलते हुए भी संस्था के सदस्यों ने हार नहीं मानी और टेक्नोलोजी का लाभ उठाते हुए डिज़िटल प्लेटफ़ॉर्म पर अपने कार्यक्रम निरन्तर करते रहे | डॉ लक्ष्मी ने इस अवसर पर एक बहुत ख़ूबसूरत गीत “उदय हुआ नवयुग का सूरज, जगी देश की नारी” अपनी सुरीली आवाज़ में प्रस्तुत किया | साथ ही उन्होंने कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रसिद्ध शिक्षाविद डॉ प्रभजोत कुलकर्णी के विषय में बताते हुए उनका स्वागत भी किया | संस्था की ओर से डॉ कुलकर्णी को एक प्रशस्ति चिह्न भी भेंट किया गया |

मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए डॉ प्रभजोत कुलकर्णी ने WOW India के द्वारा 2019 में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर प्रस्तुत एक नाटिका “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ हुनर सिखाओ” की चर्चा करते हुए इच्छा व्यक्त की कि हम लोग यदि स्कूल कॉलेजेज़ में भी Awareness program के अन्तर्गत इस तरह की छोटी छोटी झलकियाँ प्रस्तुत कर सकें तो अच्छा रहेगा | साथ ही ये भी कि हम लोग जिस तरह पहले स्कूल कॉलेजेज़ में हेल्थ चेकअप पर भी ध्यान दें |

Dr. Prabhjot Kulkarni
Dr. Prabhjot Kulkarni

उनका ये प्रस्ताव वास्तव में संस्था के लिए गौरव की बात है और इस दिशा में संस्था कार्य भी करेगी | डॉ कुलकर्णी ने इस बात पर चिन्ता भी ज़ाहिर की कि महिला दिवस पर तो हम सब महिलाओं की, कन्याओं की तारीफें करते हैं, लेकिन अभी भी समाज में बहुत सी ऐसी कुरीतियाँ विद्यमान हैं जो निकल जानी चाहियें | और ये भी कि इस कार्य के लिए महिलाओं को ही आगे आना होगा – और Choose to Challenge थीम का उद्देश्य भी यही है | यदि एक महिला अपने आपमें सशक्त होगी, Perfect होगी तो उसका परिवार सशक्त होगा, परिवार सशक्त होगा तो समाज सशक्त होगा और समाज सशक्त होने से देश सशक्त होगा |

इस सबके बाद आरम्भ हुआ Award ceremony और रंगारंग कार्यक्रमों का धमाकेदार सिलसिला | इस वर्ष WOW India और DGF ने अपनी Branch Presidents को Woman of the Year Award से सम्मानित किया | Awardees हैं EDGF की President डॉ. ज्योति अग्रवाल, WOW India की सूर्य नगर ब्रांच की President अर्चना गर्ग, WOW India की योजना विहार ब्रांच की President विमलेश अग्रवाल. WOW India की IPEX ब्रांच की President रचना सरीन और WOW India की इन्द्रप्रस्थ ब्रांच की President मोनिका भार्गव |

इस अवसर पर बहुत ख़ूबसूरत नृत्य भी हमारे सदस्यों ने प्रस्तुत किये | जिनमें WOW India की यंग ब्रिगेड से नन्दिनी भार्गव, सान्या गोयल और युवी कपूर ने, WOW India की IPEX ब्रांच से रचना सरीन, अलका श्रीवास्तव और बाला अबरोल ने और सूर्य नगर ब्रांच से अर्चना गर्ग, रेखा अस्थाना, नेहा मनकानी, रूबी शोम, सुनन्दा श्रीवास्तव, उषा रस्तोगी और सुधा मनकानी ने बड़ी उत्साहपूर्ण और मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियाँ दीं | इनके अतिरिक्त मोनिका शर्मा और उनकी बेटी नव्या शर्मा ने एक बहुत

Mrs. Banu Bansal
Mrs. Banu Bansal

ही सुन्दर नृत्य प्रस्तुत किया | IPEX Branch की पूजा टंडन, वन्दना वर्मा और शिल्पी गोयल तथा योजना विहार ब्रांच की विमलेश अग्रवाल की नृत्य प्रस्तुतियाँ हम कल पहले ही यू ट्यूब पर अपलोड कर चुके थे |

अन्त में WOW India की Secretary General डॉ पूर्णिमा शर्मा ने WOW India के Vision & Mission से सदस्यों को अवगत कराया और फिर संस्था की उपाध्यक्ष बानू बंसल जी के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ | कार्यक्रम का संचालन WOW India की Cultural Secretary लीना जैन ने किया | उन्होंने जिस तरह से सारे कार्यक्रम को अपनी ठहरी हुई शैली में एक सिलसिलेवार तरीक़े से कहानी बुनते हुए प्रस्तुत किया वह वास्तव में बहुत सराहनीय रहा और उसके कारण कार्यक्रम में और चार चाँद लग गए | इसके लिए लीना जैन बधाई की पात्र हैं |

आज ही हम सारे कार्यक्रम को अपने यू ट्यूब चैनल पर अपलोड करके उसका लिंक आप सबके साथ साँझा करेंगे ताकि जो लोग कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सके वे भी इस कार्यक्रम का आनन्द उठा सकें |

रिपोर्ट: डॉ पूर्णिमा शर्मा, Secretary General WOW India

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मानसिक तनाव और अवसाद

हम जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफल रहें और हमें किसी प्रकार का मानसिक तनाव न हो इसके लिए हमें जीवन भर कहीं न कहीं से कोई न कोई सलाह मिलती ही रहती है – यह करो, वह न करो – इत्यादि इत्यादि, और आप स्वयं को इस सुझावों के चक्रव्यूह में घिरा अनुभव करने लगते हैं | पर क्या आज के समय में ऐसा कोई व्यक्ति है जो तनाव रहित जीवन जी रहा हो ? कभी कभी तो लगता है कि ये तनाव मनुष्य के जीवन का अभिन्न अंग हैं | इनसे भागा नहीं जा सकता, हाँ इन्हें कम अवश्य किया जा सकता है | बहुत से तनाव तो ऐसे होते हैं कि जिनका कोई औचित्य ही नहीं होता | अनावश्यक रूप से हमने उन तनावों को ओढ़ लिया होता है |

इसलिए सबसे पहली आवश्यकता है कि हम अपने जीवन का, अपनी भावनाओं का और अपने परिवेश का अच्छी तरह आकलन करें | इससे हमें उन वस्तुओं, उन परिस्थितियों, उन सम्बन्धों को पहचानने में सहायता प्राप्त होगी जिनके कारण हमें तनाव होता है | उन बातों की एक सूची तैयार करें जिनके कारण हमें तनाव होता है | अब इस सूची में से उन बातों को खोजें जो हमारे लिए निरर्थक हैं और जिन्हें हम सरलता से अपने जीवन से निकाल सकते हैं | अब ईमानदारी के साथ इन्हें अपने जीवन से निकालने का प्रयास करें | इनमें से कुछ टेंशन तो ऐसी होंगी जिन्हें हम अपनी जीवनशैली यानी लाइफ स्टाइल में सुधार करके दूर कर सकते हैं |

साथ ही, सम्बन्धों के प्रति ईमानदार रहें | कुछ सम्बन्ध ऐसे भी होंगे जो हमारे लिए निरर्थक या हम पर बोझ होंगे और उनके कारण हमें निरन्तर तनाव का – नकारात्मकता का अनुभव होता होगा | उन सम्बन्धों को यदि छोड़ा भी नहीं जा सकता है तो कम से कम उनसे विनम्रता पूर्वक इतनी दूरी अवश्य बनाई जा सकती है कि वे आपको प्रभावित न कर सकें | सम्बन्ध परस्पर सम्मान की भावना पर आधारित होने चाहिएँ और उनमें किसी प्रकार की अपेक्षा दोनों ही ओर से नहीं होनी चाहिए | साथ ही, यदि आप विवाहित हैं, तो ध्यान रहे – विवाहेतर सम्बन्ध सदैव तनाव का कारण होते हैं |

अपने जीवन मूल्यों और अपने कार्य के प्रति निष्ठावान रहें | और अपने प्रति भी निष्ठावान रहें | ऐसा करने से आपका बहुत से तनाव स्वतः ही दूर हो जाएगा | बहुत से तनाव तो इसलिए भी उत्पन्न होते हैं कि हमें वो कार्य करने पड़ते हैं जिनमें हमारी रुचि नहीं होती | माता पिता या रिश्तेदारों ने कहा ये कोर्स कर लो, ये काम कर लो, उसमें रूचि है या नहीं – लेकिन करना पड़ जाता है | ऐसे में न तो उस कार्य में मन लगेगा और न ही उसमें पूर्ण कुशलता प्राप्त हो पाएगी | और यही सबसे कारण बन जाएगा मानसिक तनाव का – मानसिक अवसाद का | इसलिए प्रयास ऐसा करना चाहिए की आपकी शिक्षा दीक्षा यानी एजुकेशन और आपका व्यवसाय यानी प्रोफेशन आपकी रुचि का हो | केवल पैसा कमाने के लिए काम करेंगे तो तनाव स्वाभाविक है | और इस बात को आपके परिवारजनों को भी समझना आवश्यक है | भले ही आपको सपरिवार इसके लिए काउंसलिंग ही क्यों न लेनी पड़े | ऐसा करके आपको उचित दिशा निर्देश प्राप्त होगा और आप सफलतापूर्वक बिना किसी तनाव के अपना कार्य करने में सक्षम हो सकेंगे |

ध्यान रहे हमारे पास दिन भर में 24 घण्टे ही होते हैं, लेकिन हम सारे संसार को प्रसन्न रखना चाहते हैं – जिसके लिए 48 घण्टे भी कम पड़ जाते हैं और हम मानसिक तनाव में आ जाते हैं | इसलिए सोच समझ कर अपनी सामर्थ्य के अनुसार कार्य करना चाहिए |

यदि जीवन शैली और सोच इस प्रकार की होगी तो सरलता से एक ईमानदार, सत्यता से युक्त, आनन्दमय लेकिन सादा जीवन जी सकते हैं |

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2020/06/27/mental-stress-and-depression/

 

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मानसिक शान्ति

मानसिक शान्ति – जिसकी आजकल हर किसी को आवश्यकता है – चाहे वह किसी भी व्यवसाय से जुड़ा हो, गृहस्थ हो, सन्यासी हो – विद्यार्थी हो – कोई भी हो – हर किसी

Dr. Purnima Sharma
Dr. Purnima Sharma

का मन किसी न किसी कारण से अशान्त रहता है | और हम अपनी मानसिक अशान्ति का दोष अपनी परिस्थितियों तथा अपने आस पास के व्यक्तियों पर – समाज पर – मढ़ देते हैं | कितना भी ब्रह्म मुहूर्त में प्राणायाम, योग और ध्यान का अभ्यास कर लिया जाए, कितना भी चक्रों को जागृत कर लिया जाए – मन की अशान्ति, क्रोध, चिड़चिड़ापन और कई बार उदासी यानी डिप्रेशन भी – जाता ही नहीं | किन्तु समस्या यह है कि जब तक व्यक्ति का मन शान्त नहीं होगा तब तक वह अपने कर्तव्य कर्म भी सुचारु रूप से नहीं कर पाएगा, क्योंकि मन एक स्थान पर – एक लक्ष्य पर स्थिर ही नहीं रह पाएगा | हमने ऐसे लोग देखें हैं जो नियमित ध्यान का अभ्यास करते हैं, प्राणायाम, ध्यान और योग सिखाते भी हैं – लेकिन उनके भीतर का क्रोध, घृणा, लालच, दूसरों को नीचा दिखाने की उनकी प्रवृत्ति में कहीं किसी प्रकार की कमी नहीं दिखाई देती |

अस्तु, मन को शान्त करने के क्रम में सबसे पहला अभ्यास है मन को – अपने ध्यान को – उन बातों से हटाना जिनके कारण व्यवधान उत्पन्न होते हैं या मन के घोड़े इधर उधर भागते हैं | जब तक इस प्रकार की बातें मन में रहेंगी – मन का शान्त और स्थिर होना कठिन ही नहीं असम्भव भी है | इसीलिए पतंजलि ने मनःप्रसादन की व्याख्या दी है |

महर्षि पतंजलि ने ऐसे कुछ भावों के विषय में बताया है जो इस प्रकार की बाधाओं को दूर करने में सहायक होते हैं | ये हैं – मित्रता, करुणा या संवेदना और धैर्य तथा समभाव | निश्चित रूप से यदि मनुष्य इन प्रवृत्तियों को अपने दिन प्रतिदिन के व्यवहार में अपना लेता है तो नकारात्मक विचार मन में आने ही नहीं पाएँगे | किसी भी व्यक्ति के किसी विषय में व्यक्तिगत विचार हो सकते हैं | यदि उसके उन विचारों से किसी को कोई हानि नहीं पहुँच रही है तो हमें इसकी आलोचना करने का या उसे टोकने का कोई अधिकार नहीं | ऐसा करके हम अपना मन ही अशान्त नहीं करते, वरन अपनी साधना के मार्ग में व्यवधान उत्पन्न करके लक्ष्य से बहुत दूर होते चले जाते हैं |

अतः जब भी और जहाँ भी कुछ अच्छा – कुछ आनन्ददायक – कुछ सकारात्मक ऊर्जा से युक्त दीख पड़े – हमें सहज आनन्द के भाव से उसकी सराहना करनी चाहिए और यदि सम्भव हो तो उसे आत्मसात करने का प्रयास भी करना चाहिए, ताकि हमारे मन में वह आनन्द का अनुभव दीर्घ समय तक बना रहे – न कि अपनी व्यक्तिगत ईर्ष्या, दम्भ, अहंकार आदि के कारण उस आनन्ददायक क्षण से विरत होकर उदासी अथवा क्रोध की चादर ओढ़कर एक ओर बैठ जाया जाए | ऐसा करके आप न केवल उस आनन्द के क्षण को व्यर्थ गँवा देंगे, बल्कि चिन्ताग्रस्त होकर अपनी समस्त सम्भावनाओं को भी नष्ट कर देंगे | आनन्द के क्षणों में कुछ इतर मत सोचिए – बस उन कुछ पलों को जी लीजिये | इसी प्रकार जब कभी कोई प्राणी कष्ट में दीख पड़े हमें उसके प्रति दया, करुणा, सहानुभूति और अपनापन दिखाने में तनिक देर नहीं करनी चाहिए | आगे बढ़कर स्नेहपूर्वक उसे भावनात्मक अवलम्ब प्रदान चाहिए |

इस प्रकार चित्त प्रसादन के उपायों का पालन करके कोई भी व्यक्ति मानसिक स्तर पर एकाग्र तथा प्रसन्न अवस्था में रह सकता है | यदि हमारा व्यवहार ऐसा होगा – यदि इन दोनों बातों का अभ्यास हम अपने नित्य प्रति के जीवन में करेंगे – तो हमारा चित्त प्रसन्न रहेगा – और विश्वास कीजिये – इससे बड़ा ध्यान का अभ्यास कुछ और नहीं हो सकता | इस अभ्यास को यदि हम दोहराते रहते हैं तो कोई भी विषम परिस्थिति हमारा चित्त अशान्त नहीं कर पाएगी – किसी भी प्रकार का नकारात्मक विचार हमारे मन में नहीं उत्पन्न होने पाएगा और हमारा मन आनन्दमिश्रित शान्ति का अनुभव करेगा… डॉ पूर्णिमा शर्मा 

 

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आओ मिलकर कोरोना से लडें

आज प्रथम नवरात्र के साथ ही विक्रम सम्वत 2077 और शालिवाहन शक सम्वत 1942 का आरम्भ हो रहा है । सभी को नव वर्ष, गुडी पर्व और उगडी की हार्दिक शुभकामनाएँ…

कोरोना जैसी महामारी से सारा ही विश्व जूझ रहा है – एक ऐसा शत्रु जिसे हम देख नहीं सकते, छू नहीं सकते – पता नहीं कहाँ हवा में तैर रहा है और कभी भी किसी पर भी आक्रमण कर सकता है । और एक बात, जो बेचारा ग़रीब फुटपाथ पर सो रहा है उसके लिए ये वायरस शायद इतना ख़तरनाक नहीं है जितना मध्यम और उच्च वर्ग के लोगों के लिए हो सकता है । कारण ?

पहली बात तो उस ग़रीब का इम्यून सिस्टम बड़ा स्ट्रॉन्ग होता है क्योंकि न तो वो हमारी आपकी तरह से आर ओ का पानी पीता है न बार बार हाथों पर सेनिटाइजर लगाता है । हर दिन पसीना बहाता है तब कहीं जाकर दो वक़्त की रोटी का जुगाड़ कर पाता है और इस पसीने के साथ शरीर के बहुत सा विष बाहर निकाल फेंकता है | हम जैसे लोगों ने आर ओ का पानी पी पीकर अपना इम्यून सिस्टम बहुत कमज़ोर कर लिया है । प्रकृति से दूर हो गए हैं । सुख सुविधाओं के इतने अधिक अभ्यस्त हो चुके हैं कि पसीना बहाना हमें आता नहीं – योग या कसरत भी करते हैं तो वो भी एयरकंडीशंड जिम या घरों के एयरकंडीशंड कमरों में – पसीना कहाँ से बहेगा | दूसरे, उस ग़रीब का कोई परिचित या सगा सम्बन्धी विदेश से वापस नहीं आया है । न ही उसे हम पास बैठाते हैं, न ही उससे हाथ मिलाते हैं कि उसे वायरस लग जाएगा । और हमारे जैसे समझदार लोग जनता कर्फ्यू के दौरान शाम को पाँच बजे घरों से बाहर निकल कर जुलूस निकालते हैं, भँगड़ा करते हैं – जैसे कोई उत्सव मना रहे हों । क्योंकि हम लोग स्वयं को अनुशासन में रखना जानते ही नहीं । इसी कारण से देश भर में लॉकडाउन करना पड़ा सरकार को । माना इसके परिणाम आर्थिक रूप से अच्छे नहीं होंगे, लेकिन अगर जीवन बच गया और स्वास्थ्य सही रहा तो अर्थ व्यवस्था फिर से सुधरनी आरम्भ हो जाएगी ।

हमारे कुछ प्रिय मित्रों ने कहा “आप जैसे ज्योतिषी कुछ कर सकते हैं…” बड़ी हँसी आई मैसेज पढ़कर | भैया, ज्योतिषी कोई भगवान नहीं होता | उसने जो कुछ अध्ययन किया है उन्हीं सूत्रों और अपने अनुभवों के आधार पर फल कथन करता है कि ग्रहों के गोचर इस प्रकार के हैं, दशाएँ इस प्रकार की हैं तो इन सबके ये मिले जुले परिणाम हो सकते हैं | इसीलिये बार बार दोहराते हैं कि किसी अन्धविश्वास का शिकार होने से कोई लाभ नहीं | समस्या सबको दीख पड़ रही है, और इस समस्या का समाधान भी हमारे विचार से इस लॉकडाउन में ही है | तो, इस लॉकडाउन से घबराएँ नहीं । हमें ये 21 दिन का समय मिला है कि बैठकर आत्ममन्थन करें, कुछ सकारात्मक और रचनात्मक कार्य करें । कुछ स्वाध्याय में मन लगाएँ और मन को शान्त रखने के लिए तथा Positivity बनाए रखने के लिए ध्यान का अभ्यास करें | साथ ही जैसा हमारे प्रिय प्रधानमन्त्री ने कहा, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोग रात दिन एक किये दे रहे हैं इस बीमारी की रोक थाम के लिए | पुलिस के लोग न जाने कितने लोगों के संपर्क में आते होंगे, लेकिन बिना किसी भय के अपनी ड्यूटी का पालन मुस्तैदी से कर रहे हैं | मीडिया कर्मी हमें जागरूक बनाए रखने के लिए पल पल की रिपोर्ट हम तक पहुँचा रहे हैं | हमारे घरों में राशन, दूध और दवाएँ आदि ज़रूरत के सामान पहुँचाने वाले लोग जो बिना डरे अपना कार्य कर रहे हैं | इन सभी को हृदय से धन्यवाद देते रहें | और जब कभी मन में किसी प्रकार की निराशा का भाव उत्पन्न हो तो उन लोगों के विषय में सोचें जो रोज़ कुआँ खोद कर पानी पीते हैं – यानी रोज़ मज़दूरी करते हैं तब उनके घरों में चूल्हे जलते हैं । हम लोगों के घरों में और कुछ भी नहीं तो इतना तो निकल ही आएगा कि नमक से रोटी खा लें, लेकिन उन बेचारों के पास तो ये सुविधा भी नहीं है ।

नवरात्र आरम्भ हो गए हैं, आवश्यक नहीं कि पूरे सामान के साथ कलश स्थापना न कर पाने से दुःखी हुआ जाए, घर में बैठकर माँ भगवती का ध्यान करें, जाप करें, पाठ करें और प्रार्थना करें कि संसार को इस समस्या से मुक्ति प्राप्त हो ।

माँ भगवती अपने नौ रूपों के साथ सभी का कल्याण करें…

bookmark_borderA humble request to all WOW members

?? A humble request to all WOW members ??
?? WOW India के सभी सदस्यों से एक विनम्र निवेदन ??

आप सभी से निवेदन है कृपा करके कल घरों में ही रहें, और सम्भव हो तो घरों में आपकी सहायता के लिए आने वाली महिलाओं (यानी कामवाली बाई जिन्हें आमतौर पर बोलते हैं), ड्राइवरों, प्रेस वालों, कार साफ़ करने वालों आदि की भी हार्दिक धन्यवाद सहित कल छुट्टी कर दें – लेकिन उनका वेतन न काटें । ऐसा आप स्वयं के, परिवार के, समाज व देश सभी के स्वास्थ्य के लिए करेंगे । ये जनता कर्फ्यू” कोई ऐसा कर्फ्यू नहीं है जहाँ पुलिस आपके हमारे सिरों पर खड़ी रहेगी, ये एक जागरूकता के लिए चलाया गया अभियान है । हम सब मिलकर कोरोना को तीसरे स्तर पर पहुँचने से रोक सकते हैं । नहीं तो दूसरे देशों का हाल हम सबने देखा ही है – जहाँ की जनसंख्या भी हमारे देश के मुक़ाबले बहुत कम है लेकिन कितनी तेज़ी से वहाँ महामारी फैली, कितनी लोगों को संक्रमित किया और कितनों की जान ले ली । हमें उस स्तर पर नहीं पहुँचना है । हमारी केन्द्र सरकार और सभी राज्य सरकारें अपने अपने स्तर पर बहुत अच्छे प्रयास कर रही हैं इसे रोकने के लिए – हमें अपने स्तर पर प्रयास करने होंगे – पैनिक हुए बिना – डरे बिना । साथ ही हमें अपने डॉक्टर्स और नर्सेज़ का धन्यवाद करना भी नहीं भूलना है जो रात दिन जान हथेली पर लेकर किसी बॉर्डर पर तैनात सिपाही की तरह हम सबका स्वास्थ्य सुरक्षित रखने में जुटे हुए हैं, और ऐसा केवलमात्र कल ही नहीं करना, जीवन के इन रक्षकों को तो सदा ही धन्यवाद देना चाहिए…

डॉ. पूर्णिमा शर्मा ??

A humble request to all WOW members
A humble request to all WOW members

bookmark_borderHomeopathy – A holistic specialized treatment option

Homeopathy – A holistic specialized treatment option

Homeopathy is an individualized mode of treatment which is tailor made for a particular patient. It was discovered more than two hundred years ago by a German doctor Dr. C S F Hahnemann. It is useful for a number of conditions and diseases.

The most interesting part about the treatment is that it can treat you even when you are not diagnosed with an illness but you have a lot of complaints. It can also treat you when you have one or many diseases diagnosed together. The homeopathic doctor asks you a detailed history of your complaints, your past medical history, your family history of diseases and your general symptoms. Based on this detailed history, your personal likes and dislikes, your sleep position etc. the doctor tries to understand what is wrong with your system and how it can be corrected.

The doctor prescribes medicines which have to be taken two or three times a day in pill form. These pills have very low-calorie value and are absolutely safe for diabetics as well. Sometimes weekly medicines are also given to boost your immunity so this prevents you from falling sick also. The doctor can manage your acute diseases as well as chronic diseases together. Regular treatment improves your quality of life and you understand your cause or causes of falling sick. Even if you have mental symptoms or emotional problems, the medicines can remove them without much delay.

The common myth about homeopathy being slow is no longer true because the treatment protocol is designed in a manner to give you speedy recovery. Another lesser known benefit of homeopathy is that it can treat problems which you forget to tell your doctor or which you are unaware of. If the treatment protocol suits you even those complaints that you never discussed would be taken care of over a period of time. This is because homeopathy acts on the functional level and the normal functioning of your organs is achieved.

It boosts your mental, spiritual, physical as well as emotional well-being and is the safest way to rediscover health.

 

 (Dr Priya Kapoor, BHMS, MD (Hom) is the is a Homeopathic consultant with over eighteen years of clinical experience. She is a graduate and post- graduate in Homeopathy from Nehru Homeopathic Medical College and Hospital, University of Delhi and Aurangabad respectively. She has the experience of working with a renowned homeopath Dr. Jugal Kishore for seven years and has been involved in researching and writing books on Homeopathy. She has the experience of working in Pushpanjali Crosslay hospital, now max Superspeciality for last ten years.)

bookmark_borderGreetings from our chairperson

Greetings from our chairperson

friends..,

Take one minute.. & spell your USP

Dr. Sharda Jain
Dr. Sharda Jain

Your special point..

We don’t stop dreaming and exploring because we grow old.

I strongly believe  ..We grow old because we stop dreaming and exploring… How to help others, my colleagues, my friends

My fundas are 3

Remain student alway. Curiosity to learn should never die… Otherwise u will atrophy fast.

put your 100 percent.enjoy what u do. It should be calling, passion.

Give helping hand to younstees & colleagues… & leave ????? a legacy… Jo mahakti rahe..

Aisee chaap  jo mitaye se bhee na mite

? my blessings ??❤ & pranam on this great day

Sharda