Call Us:

+91-11-22414049, 22453724

Email Us:

info@wowindia.info

Blog: Dates for Chaitra Navratri

Dates for Chaitra Navratri

Dates for Chaitra Navratri

Katyayani Dr. Purnima Sharma
Katyayani Dr. Purnima Sharma

चैत्र नवरात्र 2021 की तिथियाँ

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी तेरह अप्रैल मंगलवार से नवरात्र आरम्भ होने जा रहे हैं | विक्रम सम्वत 2078 का नाम आनन्द है तथा शक सम्वत 1943 का नाम प्लव है | इसी दिन से घट स्थापना तथा माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप “शैलपुत्री” की उपासना के साथ ही चैत्र नवरात्र – जिन्हें वासन्तिक और साम्वत्सरिक नवरात्र भी कहा जाता है – के रूप में माँ भवानी के नवरूपों की पूजा अर्चना आरम्भ हो जाएगी जो 21 अप्रैल को भगवान श्री राम के जन्मदिवस रामनवमी और कन्या पूजन के साथ सम्पन्न होगी | इसी दिन उगडी और गुडी पर्व भी है | साथ ही चौदह अप्रैल को बैसाखी का पर्व और पन्द्रह अप्रैल को पौहिला बैसाख भी है | सर्वप्रथम सभी को उगडी, गुडी पर्व, बैसाखी, पौहिला बैसाख और साम्वत्सरिक नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाएँ…

इस वर्ष का राजा और मन्त्री दोनों ही मंगल हैं | धान्येश यानी फसलों का स्वामी बुध है, मेघेश यानी वर्षा के स्वामी मंगल और चन्द्र हैं, रसेश यानी सभी प्रकार के रसों के स्वामी सूर्य, निरेशेश यानी धातु के स्वामी शुक्र तथा फलेश यानी फलों और सब्ज़ियों के स्वामी चन्द्र हैं | इस वर्ष यों तो प्रतिपदा तिथि का आरम्भ बारह अप्रैल को प्रातः आठ बजे के लगभग हो जाएगा जो तेरह अप्रैल को प्रातः सवा दस बजे तक रहेगी | किन्तु, प्रथमतः बारह अप्रैल को उदया तिथि नहीं है और साथ ही वैधृति योग भी बारह अप्रैल को दिन में लगभग ढाई बजे तक रहेगा | अतः घट स्थापना तेरह अप्रैल को ही की जाएगी | इस दिन सूर्योदय प्रातः 5:57 पर होगा और सूर्योदय के समय मीन लग्न में भगवान भास्कर होंगे, अश्विनी नक्षत्र, बव करण तथा विषकुम्भ योग होगा | साथ ही लग्न में बुधादित्य योग भी बन रहा है और द्विस्वभाव लग्न है जो घट स्थापना के लिए अत्युत्तम मानी जाती है | अतः प्रातः 5:57 से सवा दस बजे तक घट स्थापना का शुभ मुहूर्त है | जो लोग इस अवधि में घट स्थापना नहीं कर पाएँगे वे 11:56 से 12:47 तक अभिजित मुहूर्त में घट स्थापना कर सकते हैं | किन्तु साथ ही व्यक्तिगत रूप से घट स्थापना का मुहूर्त जानने के लिए अपने ज्योतिषी से अपनी कुण्डली के अनुसार मुहूर्त ज्ञात करना होगा | बुधवार 21 अप्रेल को कन्या पूजन के साथ ही नवरात्रों का विसर्जन हो जाएगा | अस्तु, सर्वप्रथम सभी को नव सम्वत्सर, गुडी पर्व, बैसाखी, पौहिला बैसाख और उगडी या युगादि की हार्दिक शुभकामनाएँ…

नवरात्रि के महत्त्व के विषय में विशिष्ट विवरण मार्कंडेय पुराण, वामन पुराण, वाराह पुराण, शिव पुराण, स्कन्द पुराण और देवी भागवत आदि पुराणों में उपलब्ध होता है | इन पुराणों में देवी दुर्गा के द्वारा महिषासुर के मर्दन का उल्लेख उपलब्ध होता है | महिषासुर मर्दन की इस कथा को “दुर्गा सप्तशती” के रूप में देवी माहात्मय के नाम से जाना जाता है | नवरात्रि के दिनों में इसी माहात्मय का पाठ किया जाता है और यह बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है | जिसमें 537 चरणों में सप्तशत यानी 700 मन्त्रों के द्वारा देवी के माहात्मय का जाप किया जाता है | इसमें देवी के तीन मुख्य रूपों – काली अर्थात बल, लक्ष्मी और सरस्वती की पूजा के द्वारा देवी के तीन चरित्रों – मधुकैटभ वध, महिषासुर वध तथा शुम्भ निशुम्भ वध का वर्णन किया जाता है | इस वर्ष नवरात्रों की तिथियाँ इस प्रकार हैं…

मंगलवार 13 अप्रैल   चैत्र शुक्ल प्रतिपदा   देवी के शैलपुत्री रूप की उपासना और घट स्थापना प्रातः 5:57 से सवा दस बजे तक मीन लग्न, बव करण और विषकुम्भ योग में, अभिजित मुहूर्त दिन में 11:56 से 12:47 तक

बुधवार 14 अप्रैल    चैत्र शुक्ल द्वितीया   देवी के ब्रह्मचारिणी रूप की उपासना, सूर्य का मेष राशि में संक्रमण, सौर नव वर्ष  

गुरूवार 15 अप्रैल    चैत्र शुक्ल तृतीया    देवी के चंद्रघंटा रूप की उपासना, गणगौर, पौहिला बैसाख  

शुक्रवार 16 अप्रैल    चैत्र शुक्ल चतुर्थी     देवी के कूष्माण्डा रूप की उपासना  

शनिवार 17 अप्रैल   चैत्र शुक्ल पञ्चमी    देवी के स्कन्दमाता रूप की उपासना, लक्ष्मी पञ्चमी  

रविवार 18 अप्रैल    चैत्र शुक्ल षष्ठी     देवी के कात्यायनी रूप की उपासना, स्कन्द षष्ठी, यमुना छठ, रामानुज जयन्ती  

सोमवार 19 अप्रेल   चैत्र शुक्ल सप्तमी    देवी के कालरात्रि रूप की उपासना, चैत्र नवपद ओली आरम्भ  

मंगलवार 20 अप्रेल   चैत्र शुक्ल अष्टमी    देवी के महागौरी रूप की उपासना

बुधवार 21 अप्रैल    चैत्र शुक्ल नवमी     देवी के सिद्धिदात्री रूप की उपासना, श्री राम जन्म महोत्सव  – राम नवमी

माँ भगवती सभी का कल्याण करें… सभी को नव सम्वत्सर तथा नवरात्र की अग्रिम रूप से हार्दिक शुभकामनाएँ…

________कात्यायनी डॉ पूर्णिमा शर्मा