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bookmark_borderमुलाक़ात एक राजनेता से

मुलाक़ात एक राजनेता से

कात्यायनी डा पूर्णिमा शर्मा
कात्यायनी डा पूर्णिमा शर्मा

अभी पिछले दिनों माननीय सांसद Hon’ble Union Minister of State Corporate Affairs, Road Transport & Highways श्री हर्ष मल्होत्रा जी से उनके निवास पर अपनी संस्था की प्रमुख उपाध्यक्ष श्रीमती बानू बंसल और सांस्कृतिक सचिव श्रीमती लीना जैन के साथ भेंट हुई | एक बार पिछले महीने और एक बार इसी माह | हम उन्हें अपनी संस्था WOW India के वार्षिक कार्यक्रम “महारानी अहिल्याबाई होल्कर अवॉर्ड्स सेरेमनी” के लिए मुख्य अतिथि के रूप में आमन्त्रित करने गए थे | वहाँ जाकर देखा तो उनसे मिलने आने वालों का तांता लगा हुआ था – जिसे देखकर स्पष्ट हो गया कि माननीय मंत्री जी आम जनता की बातों को सुनता भी हैं और उनकी समस्याओं पर विचार भी करते हैं | अत्यधिक व्यस्त होने के बाद भी उन्होंने न केवल हमें पूरा समय दिया बात करने के लिए, हमारी संस्था और हम लोगों के विषय में जानने के लिए, बल्कि कार्यक्रम में उपस्थित रहने के लिए अपनी सहमति भी प्रदान की | हमें तो लग रहा था कि पता नहीं बात हो पाएगी या नहीं, क्योंकि एक बार मन्त्री बन जाने के बाद व्यस्तताएँ बहुत अधिक बढ़ जाती हैं | किन्तु परिणाम आशा एक विपरीत रहा – न केवल हम लोगों से पूरा समय लगाकर बात की बल्कि अपनी सहमती भी प्रदान की | वास्तव में, आज देश को इसी तरह के समर्पित राजनेताओं की आवश्यकता है जिन तक आम जन सरलता से पहुँच सकें और अपनी बात उन तक पहुँचा सकें | और यही नहीं, हमने देखा उनकी धर्मपत्नी आदरणीया बबीता हर्ष मल्होत्रा जी भी जनता के सम्पर्क में रहकर मल्होत्रा जी तक उनकी बात पहुँचाने में व्यस्त रहती हैं | हमने देखा ऊपर उनसे मिलने जाने वालों का भी ताँता लगा हुआ था | बहुत ही सुखद अनुभव हुआ यह सब देखकर | ऐसे समर्पित राजनेता बहुत कम होते हैं | आदरणीय हर्ष मल्होत्रा जी के हम हृदय से आभारी हैं |

डॉ पूर्णिमा शर्मा, सेक्रेटरी जनरल WOW India

Invitation
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bookmark_borderउम्र या सिर्फ नंबर

उम्र या सिर्फ नंबर

पूजा भरद्वाज
पूजा भरद्वाज

बच्चा जब जन्म लेता है तो वह एक मासूम सा प्यारा सा बच्चा होता है | हर परेशानियों से दूर जिम्मेदारियों से मुक्त बचपन जब बच्चा बड़ा होता है, स्कूल जाता है, खेलता है और लंच तो ब्रेक से पहले ही खत्म हो जाता है और, उनका दिल साफ, उड़ने के लिए तैयार, आसमान को छूने को तैयार, तब तक यह सिर्फ नंबर ही होते हैं | बड़े होते हैं | नए दोस्त, पढ़ाई का बोझ, वह केवल नंबर होते हैं इस तरह बचपन खुशनुमा मस्ती भरा, थोड़ा हैवी और बहुत सारी यादों के साथ बचपन का नंबर उम्र में बदलना शुरू होता है |

तब शुरू होती है एक उम्र कई जिम्मेदारियों परेशानियों के साथ अपने प्यार को पाने, के लिए भी एक अच्छे कॉलेज में एडमिशन, एक अच्छी नौकरी की | और इस भाग दौड़ में हम जीते हैं अपनी सिर्फ एक उम्र, जिसमें होते हैं कई सवाल | जैसे इतनी उम्र में एक घर, उतनी उम्र में शादी और एक मुकाम इस बीच में रह जाती है | सिर्फ केवल एक उम्र | कुछ लोग तो सिर्फ एक उम्र ही जीते हैं | ना उनकी कोई ख्वाहिश होती है ना दिल में उमंग | उन्हें याद ही नहीं रहता कि वह आखिरी बार दिल खोलकर कब हंसे थे | कब आखिरी बार बारिश में भीगे थे | कई लोग तो इतने बोर होते हैं जैसे वह अपनी जिंदगी बोझ की तरह जी रहे हैं | वे ना उम्र जीते हैं और ना ही नंबर,…….

कुछ लोगों की किस्मत साथ देती है फिर भी पैसे कमाने की होड़ में लग जाते हैं और वह इस होड़ में इतनी दूर आ जाते हैं कि उन्हें पता ही नहीं चलता कि कितने सालों से उनकी साथी कई तरह की दवाइयां बन चुकी है | कई बार तो इतनी देर हो जाती है और उन्हें पता चलता है कि उन्हें कोई गंभीर बीमारी है | फिर उनकी आखिरी समय तक रह जाता है हॉस्पिटल का एक बेड चार बाय चार का कमरा, एक गर्म पानी की बोतल, और बिना स्वाद वाला खाना, और कई सवाल – क्यों मैंने एक पिंजरे में बंद पक्षी की तरह जिंदगी जी – क्यों मैंने एक उम्र जी – क्यों मैं उसे नंबर में नहीं बदल सका…

इसलिए उठो… थोड़ा सोचो… ज्यादा देर हो जाए उससे पहले स्वयं को पहचानो… तुम्हें क्या पसंद है… और शुरूआत करो एक सफर की उम्र को नंबर में बदलने की…

सुबह उठकर 5 मिनट पसंदीदा गाने पर अपने पांव को थिरकाओ | चाहे उम्र 90 की क्यों ना हो फिर भी जिंदादिली से अपनी इच्छाओं को पूरा करो और एक बार अपना बचपन फिर जी लो | हर वह काम करो जो कहीं किसी दिल में कोने में दब गया था | एक बार फिर बचपन जी लो बच्चों के साथ बच्चे बनकर दिल खोलकर हंसो और 90 की उम्र में भी एक गोल्ड मेडल जीतो | हर वह काम करो कि मरने का अफसोस ना रहे और ना कोई सवाल, हो तो एक चेहरे पर बड़ी मुस्कान… एक खुशी… और मन की शांति कि मैंने केवल उम्र नहीं जी… मैंने अपनी उम्र को रोक दिया है सिर्फ नंबर में… और हर पल की एक सेल्फी लो… जब उसे देखो तो मन खुश हो जाए और चेहरे पर आ जाए बड़ी मुस्कान कि हमने अपनी उम्र को नंबर मैं रोक दिया,………,???

         पूजा भारद्वाज

(पूजा भारद्वाज ने दिल्ली के हंसराम कॉलेज से आर्ट्स में ग्रेजुएशन किया है | वर्तमान में ये अपने पति के साथ मिलकर financial consultancy services देती हैं | इस सबके साथ ही इन्हें पेंटिंग का तथा कुकिंग का शौक़ है | साथ में लिखने का भी शौक़ है | ये WOW India की इन्द्रप्रस्थ विस्तार ब्रांच की सदस्य हैं…) डॉ पूर्णिमा शर्मा…